{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }
ज़िन्दगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दे क्या ख़ाक जिया करते है। ये किसी ने ऐसे ही नहीं लिखा है। इसके पीछे गहरे अर्थ निहित है।
दरअसल जीवन को सुखी करने के लिए हर इंसान दिन रात मेहनत करता है किंतु ईश्वर सुख और दुःख का पलड़ा सदैव बराबर रखता है।
हमारे यहां चार सुख ऐसे बताये है जिनके होने से मनुष्य पूर्ण रूपेण सुखी हो जाता है। वो है निरोगी शरीर, धन की संतुष्टि, अनुकूल आचरण करने वाली पत्नी और आज्ञाकारी बेटा। ये चार जिसके पास है वो पूर्ण रूप से सुखी है।

कई बार ऐसा होता है कि अधिक धन को प्राप्त करने के लिए इंसान अनैतिक कर्म करने लगता है। उसे लगता है कि मैं अधिक धन कमाकर अधिक सुख प्राप्त कर सकता हूँ जो की गलत है।
कस्तूरी मृग की नाभि में कस्तूरी होती है लेकिन वो भटकता रहता है। बस यही हाल इंसान का हो जाता है जब वो धन को ही सर्वस्व मानने लगता है।
दरअसल ईश्वर इंसान को जो देना था वो तो पहले ही उसे दे चुका। उसी में संतुष्ट होकर धर्मानुकूल आचरण करना चाहिए।
एक मनुष्य को पूरी नैतिकता से अपने धर्म का पालन करते हुए कर्म करना चाहिए ताकि ईश्वर कृपा से आपको चारों सुख की प्राप्ति हो जाए।