रिपोेर्ट:खुशी पाल
पंजाब(Punjab) के विधानसभा चुनाव के लिए पंजाब में सीएम दावेदारों(CM Candidates) की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले तो सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू(Navjot Singh Sidhu) और पंजांब सीएम चरणजीत चन्नी(CM Charanjit Singh Channi) थे। लेकिन अब दो और दावेदारों के नाम इसमे जुड़ गए है। देखने की बात तो ये है कि इन सभी में से इस साल के विधानसभा चुनाव कौन जीतेगा।
हाल ही में आई खबर के मुताबिक पंजाब विधानसभा चुनाव की दावेदारी और कठिन होती चली जा रही है। साएम चन्नी और कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू के बीच कठिन प्रतिस्पर्धा तो थी ही लेकिन अब उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और सांसद प्रताप सिंह बाजवा भी पंजाब मुख्यमंत्री पद के दावेदार बन चुके है।
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वहीं, आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ट नेता भी अब सीएम चेहरे के लिए विचार-विर्मश कर रहें है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पंजाब में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार चुनने के लिए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक आयोजित कर ली है।

वहीं, प्रताप बाजवा ने हाल ही में एक टीवी चैनल में अपना बयान जारी किया। जिसमें उन्होंने कहा कि क्या किसी ने सोचा था चन्नी सीएम बन जाएंगे? तो फिर मैं क्यों नहीं? हालांकि बाजवा ने यह कहकर मुख्यमंत्री चेहरे के बारे में सस्पेंस भी बढ़ा दिया कि आगे-आगे देखिए होता है क्या? बाजवा से जब पूछा गया कि कांग्रेस में सीएम उम्मीदवार कौन हैं, तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पास चन्नी पहले से मुख्यमंत्री हैं। अगला मुख्यमंत्री कौन होगा यह दिन, समय और मूड पर निर्भर है। यहां कुछ भी स्थायी नहीं है। राजनीति में बदलाव होता रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि बयान भी बदलते रहते हैं, इसलिए आगे-आगे देखिए होता है क्या?

इस मामले पर सुखजिंदर रंधावा का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद उनका मुख्यमंत्री बनना तय हो गया था बल्कि इस पद को लिए उनके नाम पर सहमति भी बन गई थी लेकिन अंत मौके पर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना दिया और उन्हें इस रेस से बाहर कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, सुखजिंदर रंधावा ने मुख्यमंत्री पद पर जाट सिख नेता के तौर पर अपनी दावेदारी पेश की थी, जिस पर भी सहमति बन गई थी लेकिन इसी दौरान प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने भी यह कहते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दी थी कि अगर जाट सिख का प्रश्न है तो वह भी जाट सिख हैं। इसी खींचतान के बीच हाईकमान ने पार्टी के अनुसूचित जाति के नेता चरणजीत चन्नी के नाम पर मुहर लगा दी और रंधावा मुख्यमंत्री बनने से चूक गए थे।
ऐसा माना जा रहा है कि बाजवा के आने से सिद्धू के साथ-साथ रंधावा और चन्नी की मुश्किल भी बढ़ गई है। गुरदासपुर जिले के 64 वर्षीय बाजवा पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। पंजाब में एक फरवरी नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख है। 20 फरवरी को मतदान होगा। इस तरह कांग्रेस के पास भी 20 दिन से ज्यादा का समय नहीं बचा, जिसमें वह अपने अगले मुख्यमंत्री चेहरे को सामने रखकर जनता के बीच जा सकती है।