बाजार में अब वर्ष भर गेंदा के फूलों की डिमांड रहती है. त्योहारों पर या किसी आयोजन में या घरों की सजावट करनी हो, या फिर वैवाहिक कार्यक्रम हों, बिना फूलों के ये रंगहीन होते हैं, इनमें रंग उमंग भरने के लिए तो फूल होने ही चाहिए.
इसी तरह भक्ति भाव, पूजा पाठ की बात हो या उत्साह उल्लास का मौक़ा, फूलों की जरूरत होती ही है।और फूलों में गेंदे की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में किसान गेंदें की खेती कर अच्छा लाभ उठा सकते हैं। इसकी खेती में जहां लागत काफी कम आती है, वहीं आमदनी काफी अधिक होती है। गेंदा की फसल ढाई से तीन माह में तैयार हो जाती है।

एक बीघा में लागत एक हजार से डेढ़ हजार रुपये की आती है, वहीं सिंचाई की भी अधिक जरूरत नहीं होती। मात्र दो से तीन सिंचाई करने से ही खेती लहलहाने लगती है, जबकि पैदावार ढाई से तीन क्विंटल प्रति बीघा तक हो जाती है। गेंदा फूल बाजार में 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है। ख़ास त्योहारों और वैवाहिक सीजन में जब इसकी मांग बढ़ जाती है तो दाम 100 रुपये प्रति किलो तक के हिसाब से मिल जाते हैं। देश के अलग-अलग इलाक़े में इसकी बुआई मार्च से जून और अगस्त से सितंबर तक किया जाता है।

250 से 300 क्विंटल गोबर की खाद खेत की तैयारी के समय प्रति हेक्टेयर की दर से मिला देनी चाहिए। इसके साथ ही अच्छी फसल के लिए 120 किलो नाइट्रोजन , 80 किलो फॉस्फोरस और 80 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर देना चाहिए।

गेंदे के बीज को पहले पौधशाला में बोया जाता है। पौधशाला में पर्याप्त गोबर की खाद डालकर, अच्छी तरह से जुताई करके खेत को तैयार किया जाता है। मिट्टी को भुरभुरा बनाकर रेत भी डालते हैं, और तैयार खेत या पौधशाला में क्यारियां बना लेते है। क्यारियां 15 सेंटीमीटर ऊंची एक मीटर चौड़ी और 5 से 6 मीटर लम्बी बनानी चाहिए। और इसी में बीज को लाइनों में बोया जाता है।

गेंदे के बीज की मात्रा क़िस्मों के आधार पर तय होती है। जैसे संकर क़िस्मों का बीज 700 से 800 ग्राम प्रति हेक्टेयर जबकि सामान्य किस्मों का बीज 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।गेंदा के पौध की रोपाई समतल क्यारियों में की जाती है रोपाई की दूरी उगाई जाने वाली क़िस्मों पर निर्भर करती है।

गेंदे की उपज भूमि की उर्वरा शक्ति और फ़सल की देखभाल पर निर्भर करती है, इसके साथ ही सभी तकनीक अपनाते हुए आमतौर पर उपज के रूप में कम से कम 125 से 150 क्विंटल प्रति हेक्टेयर फूल मिलते हैं, जबकि कुछ अच्छी किस्मों से खेती करने पर फूल उत्पादन 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त किया जा सकता है।
इस तरह गेंदे की खेती कर आप ना सिर्फ़ आस-पास सुगंध फैला सकते हैं बल्कि खूबसूरत फूलों से लदे खेतों को निहार कर अपनी सारी थकान मिटाकर उल्लास से भर सकते हैं और साथ ही पा सकते हैं बेहतर कमाई, तो क्यों ना करें गेंदे की खेती।