इस देश की अर्थव्यवस्था में खेती का एक बहुत बड़ा योगदान है और सरकार 2022 तक किसानों की आय दुगुना करने की कोशिश में लगी हुई है और यह तब हो पायेगा जब एक तो किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिले वही खेती की लागत में कमी आये और जीरो बजट फार्मिंग कामयाब हो।

अब इस देश के किसान भाइयों के लिए सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है, दरअसल कई बार पेस्टीसाइड कंपनियों और दुकानदारों के द्वारा किसान भाइयों को नकली कीटनाशक बेच देते है और किसान भाई उसका इस्तेमाल कर देते है जिससे उनकी फसल बर्बाद हो जाती है और कई बार तो उन्हें मुआवजा भी नहीं मिल पाता क्योंकि इसकी शर्ते बड़ी कठिन होती है।

लेकिन अब नकली कीटनाशकों का कारोबार रोकने और किसान भाइयों को मुआवजा दिलाने के लिए भारत सरकार एक नया कानून लेकर आयी है जिसके बाद अगर किसी भी नकली कीटनाशक के इस्तेमाल से किसान की फसल खराब होती है तो उसे राहत दी जायेगी वही नकली कीटनाशक बेचने वाली कंपनियों पर भी जुर्माना करने का प्रावधान है।
केंद्र सरकार ने पेस्टीसाइड मैंनेजमेंट बिल 2020 में इसका प्रावधान किया है और अब कंपनियां मनमानी कीमत पर कीटनाशक नहीं बेच पाएगी।

आपको बता दे कि भारत में कीटनाशकों का निर्माण और बिक्री अधिनियम 1968 के तहत हो रही थी, काफी समय से इसे बदलने की मांग हो रही थी। मौजूदा कानून में कीटनाशकों के केवल विनिर्माण, बिक्री, आयात, परिवहन उपयोग और वितरण को शामिल कया गया है।

दरअसल पाठकों को यह जानना बेहद ज़रूरी है कि इससे पहले एक ऐसा ही बिल साल 2008 में लेकर आया गया था लेकिन कुछ कारणों से यह पास नहीं हो पाया और इसे सलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया था लेकिन अब सरकार ने इस बिल को संसोधित किया है और ताकि किसान भाइयों को कोई नकली माल नहीं बेच पाए।