रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: प्रशांत किशोर, बंगाल विधानसभा चुनाव में सिर्फ यही एक शख्स थे, जो बड़े आत्मविश्वास से कहते थे, कि भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में 100 सीटों का ऑकड़ा पार नहीं कर पायेगी। उस वक्त प्रशांत की ये बातें काफी हास्यास्पद लगती थी, और लगे भी क्यों न, जिस चुनाव में पूरी BJP पार्टी ताकत झोंक दी हो, उसके आगे प्रशातं की ये बातें कॉमेडी तो लगेगी ही। लेकिन रविवार 2 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद प्रशांत की कौटिल्य वाली नीति ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया है।
जरा आप भी सोचिए, जिस विधानसभा चुनाव में PM मोदी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपा नड्डा,गृह मंत्री अमित शाह,CM योगी,राजनाथ सिंह जैसे दिग्गज नेताओं ने रैलियां कर खुद ममता बनर्जी को डरा दिया हो, उस वक्त में ममता बनर्जी के लिए काम करने वाले आधुनिक भारत के कौटिल्य प्रशांत किशोर ताल ठोक के कहते थे कि इस विधानसभा चुनाव में BJP 100 सीट नहीं जीत पायेगी। अब जब नतीजे आ रहे हैं, उनके द्वारा कही एक-एक बात सचा साबित होती दिख रही है।
आइये जानते हैं कौन हैं, प्रशांत किशोर
44 साल के प्रशांत किशोर मूल रूप से बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव के रहने वाले हैं। कुछ समय बाद प्रशांत का परिवार यूपी-बिहार बॉर्डर से सटे बक्सर जिला में बस गया था। प्रशांत के पिता पेशे से डॉक्टर थे। बिहार में शुरुआती पढ़ाई के बाद प्रशांत ने हैदराबाद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। राजनीतिक रणनीतिकार के तौर पर करियर शुरू करने से पहले प्रशांत यूनिसेफ में जॉब करते थे और उन्हें इसके ब्रांडिंग की जिम्मेदारी मिली थी। वो 8 सालों तक यूनाइटेड नेशंस से भी जुड़े रहे और अफ्रीका में यूएन के एक मिशन के चीफ भी रहें हैं।

प्रशांत की राजनीतिक रणनातिकार के तौर पर भूमिका
प्रशांत किशोर ने सबसे पहले साल 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में BJP के प्रचार की जिम्मेदारी ली थी। उस वक्त उनकी रणनीति ने बीजेपी को 182 विधानसभा सीटों में 115 सीटें जीताकर नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाया था। इसके बाद साल 2014 के 16वें लोकसभा चुनाव में उनको भाजपा ने प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी। उस वक्त भी मोदी की अगुवाई में बीजोपी ने बहुमत से भी ज्यादा 282 सीटों पर जीत हासिल की। इस चुनाव में चाय पर चर्चा और थ्री-डी नरेंद्र मोदी का कॉन्सेप्ट प्रशांत ने ही तैयार किया था। इस चुनाव के बाद प्रशांत बतौर चुनावी रणनीतिकार बनकर उभरे थे।
इसके बाद साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत ने JDU, RJD और कांग्रेस महागठबंधन के लिए चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी ली। इस विधान सभा चुनाव में प्रशांत ने “बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार हैं”, ये नारे दिए जो काफी चर्चा में रहे। उस वक्त भी JDU, RJD और कांग्रेस के महागठबंधन को 243 में से 178 सीटों पर जीत हांसिल कि थी, जबकि एनडीए महज 58 सीटों पर सिमट ही गया था।
इसके बाद साल 2017 में प्रशांत किशोर ने पंजाब विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस के लिए रणनीति तैयार की, इस विधानसभा चुनाव में प्रशांत की रणनीति ने 117 सीटों में से 77 सीटों पर जीत दिलवाई।
इसके बाद साल 2017 के उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की जिम्मेदारी ले ली, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की रणनीति फेल हो गई। कांग्रेस और प्रशांत किशोर भी बुरी तरह से मात खाये। 403 विधानसभा सीटों में कांग्रेस को महज 47 सीटों पर जीत मिली। जबकि इस चुनाव में बीजेपी को 325 सीटों पर जीत मिली थी। यही वो ऐसा पहला मौका था जब प्रशांत की नीति भी फेल हो गई।
लोकिन इस मात के बाद वो रुके नहीं प्रशांत लगातार अपनी नीति में सुधार करते रहे और साल 2019 में आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की YSR कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को चुनावी सलाहकार बनाया। उन्होंने वाईएसआर कांग्रेस के लिए प्रचार अभियान की योजना तैयार की और वाईएसआर को 175 में से 151 सीटों पर जीत दिलाई।
फिर साल 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने प्रंशात को अपने साथ जोड़ा। आम आदमीं पार्टी ने प्रशांत को चुनावी रणनीतिकार के तौर पर आपने साथ जोड़ा था। इस चुनाव में भी प्रशांत ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लगे रहो केजरीवाल अभियान तैयार किया। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी को 70 में से 62 सीटों पर जीत मिलीं।
इसके बाद प्रशांत किशोर को ममता बनर्जी ने अपने साथ जोड़ा, चुनावी समर में पीछे दिख रही ममता बनर्जी को प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बंगाल की गद्दी सौंप दी है। हम ऐसी इसलिए कह रहें हैं कि जब चुनाव का बिगुल बजा था, तब ममता बनर्जी BJP के चुनावी रणनीति से इतनी डर गईं थी, कि विपक्ष के सभी पार्टियों को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वो इस विधानसभा चुनाव में उनका साथ दें। उस वक्त सभी पार्टियों ने अलग-अलग लड़ने का फैंसला किया। तब ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर को अपने साथ जोड़ा था।
प्रशांत के सफल रणनीति का ही परिणाम है कि ममता बनर्जी ने 200 से भी ज्यादा सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार बंगाल में सरकार बनायेंगी। वहीं 200 पार का ऑकड़ा देने वाली बीजेपी 100 सीट भी नहीं जीत पाई।
चुनाव के नतीजे आने के बाद सफल रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपने फैसले से एक बार फिर सबको चौंका दिया है। इन्होने एक टीवी चैनल से बात करते हुए एलान किया कि वो अब रणनीतिकार के तौर पर किसी के लिए काम नहीं करेंगे, उन्होने अपने इस सफल काम से संन्यास ले लिया। वो चुनाव आयोग के नियमों से काफी नाराज दिखे। प्रशात किशोर ने णनीतिकार के तौर 10 साल सफलतापूर्व काम करने के बाद अपने इस काम से संन्यास की घोषणा कर दी।