नई दिल्ली : कहा जाता है कि जो गलती अगर एक बार धोखे से हो जाएं, तो लोग उसे माफ कर देते है, लेकिन अगर कोई समझाने के बावजूद भी वहीं गलती दोबारा करें, तो उस सजा देते है। एक ऐसा ही देश की राजधानी दिल्ली से सामने आया है। जहां एक लड़के को एक लड़की को देखकर बार-बार आंख मारना और फ्लाइंग किस देना भारी पड़ गया। जिसे लेकर कोर्ट ने उसे 1 साल की सजा और 15,000 रूपये का जुर्माना लगाया है, जिसमें से 10 हजार रूपये पीड़ित पक्ष को दिये जाएंगे। आपको बता दें कि कोर्ट ने इस तरह की हरकत को यौन उत्पीड़न की श्रेणी में माना है।

एक प्राइवेट न्यूज संस्थान के रिपोर्ट के मुताबिक, 14 वर्षीय पीड़ित बच्ची ने अदालत (Court) को बताया कि 29 फरवरी को जब वह अपनी बहन के साथ कहीं जा रही थी, तब पड़ोस में रहने वाले आरोपी (Accused) ने उसे देखकर आंख मारी और उसकी तरफ हवा में किस उछाली। आरोपी पहले भी इस तरह की हरकतें कर चुका था और समझाइश के बावजूद उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया था। पीड़िता की मां ने बताया कि आरोपी युवक की हरकतों के बारे में पीड़िता ने उन्हें बताया था। उसने कई बार युवक से ऐसा नहीं करने को कहा था, लेकिन जब वो नहीं सुधरा तो उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने कई तरह की दलील दी, लेकिन कोर्ट ने उसे नजरंदाज कर दिया। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि बच्ची और उसकी मां द्वारा लगाए गए आरोपों को यौन उत्पीड़न के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस के कार्रवाई पर भी सवालियां निशान खड़ा किया और कहा कि पुलिस ने मामले की जांच सही ढंग से नहीं की है।

वहीं अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता, जिससे यह साफ हो सके कि पीड़िता ने गलत आरोप लगाए हैं। हालांकि, इसके पर्याप्त सबूत हैं कि आरोपी को कई बार ऐसी हरकतों से बाज आने को कहा गया। अदालत ने आगे कहा कि किसी को देखकर आंख मारना या हवा में किस करना उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।
इसके बाद बचाव पक्ष के वकील ने यह आरोप लगाया कि पीड़िता की कजन और आरोपी के बीच 500 रुपये की शर्त लगी थी। इसी शर्त की वजह से आरोपी ने उसे देखकर आंख मारी। हालांकि, बच्ची ने अदालत में इस आरोप से इनकार कर दिया। उसने कोर्ट से कहा कि शर्त की बात पूरी तरह गलत है। आरोपी युवक लगातार इस तरह का व्यवहार कर रहा था। बचाव पक्ष ने अदालत में बार-बार यह साबित करने का प्रयास किया कि पीड़िता और उसकी मां की दलीलें सही नहीं हैं, लेकिन अदालत ने पीड़िता के पक्ष में ही फैसला सुनाया।