रिपोर्ट: अनुष्का सिंह
देहरादून: उत्तराखंड़ विधानसभा चुनाव 2022 मे इस बार मुकाबला कड़ा है। जहाँ, बीजेपी को फिर 2017 वाला प्रदर्शन दोहराना है तो वहीं कांग्रेस को फिर वापसी करनी है। साथ ही आप भी अपनी धमक दिखाने का प्रयास करने वाली है। और इसी सब के चलते इस बार आम आदमी पार्टी भी जनता मे अपनी सोच को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसी वजह से आम आदमा पार्टी के कई मुख्य नेता पहाड़ी राज्य का दौरा कर चुके हैं। जिसमे दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं। और अब आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नौ और सीटों के लिए प्रभारी घोषित कर दिए।
आपको बता दे कि पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में मंगलवार शाम आप के सहप्रभारी राजीव चौधरी व कार्यकारी अध्यक्ष अनंत राम चौहान ने प्रभारियों की घोषणा की। साथ ही चौहान का कहना था कि “इससे पहले पार्टी 22 विधानसभा प्रभारी घोषित कर चुकी है। इस तरह पार्टी अब तक 31 प्रभारी घोषित कर चुकी है, जो बाद में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी होंगे।” तो वही प्रदेश सहप्रभारी चौधरी ने कहा कि “21 वर्ष में प्रदेश के हालात पूरी तरह से बदहाल हो चुके हैं।”जारी की गयी प्रभारियों की सूची मे थराली से गुड्डू लाल, प्रवीन बंसल- विकासनगर, बबीता चंद-गंगोलीहाट, सुरेश चंद्र बिष्ट-सल्ट, राजेश बिष्ट-लोहाघाट, नैनीताल-डॉ.भुवन चंद्र आर्य, सुमित टिक्कू-हल्द्वानी, जसपुर-डॉ.युनूस चौधरी और सूरत सिंह रौतेला-नरेंद्रनगर।का नाम शामिल हैं। बता दे कि चुने गये प्रभारी ही बाद में विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी होंगे।
बता दें कि कर्नल अजय कोठियाल को हाल ही में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए उत्तराखंड में सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद ही आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में अपनी पैठ जमाने में लगी है। जिसके चलते उत्तराखंड़ मे अपनी पकड़ बनाने के लिये फ्री बिजली का ऐलान भी किया है।

और इसी सब के चलते अब मुकाबला त्रिकोणीय नज़र आ रहा है। वैसे तो आम आदमी पार्टी जरूर अपना मुकाबला बीजेपी से मान रही है, लेकिन कांग्रेस की नजरों में अभी भी उनकी टक्कर सिर्फ बीजेपी से है। और इसी के चलते कांग्रेस पार्टी की तरफ से सिर्फ निशाना भाजपा पर ही साधा जा रहा है।
बता दे कि लगातार बदल रहे मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए विपक्षी नेता ने निशाना साधते हुऐ कहा कि “भाजपा को अपना घर संभालना चाहिए,चार साल में उन्होंने प्रदेश को तीन मुख्यमंत्री देने के आलावा कोई कार्य नहीं किया है, और जनता उनको हटाने का मन बना चुकी है।” ऐसे में उत्तराखंड का मुकाबला कड़ा है, और यह सियासी ज़ग देखने लायक होगी।