मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव के दौरान बुधनी में भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में सात लोगों की उपस्थिति पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने चुनाव आयोग पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया।
अरुण यादव का आरोप: क्या चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली?
अरुण यादव ने एक्स (X) पर लिखा, “क्या चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली बन चुका है? कल बुधनी में भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के दौरान सात लोग उपस्थित थे, जबकि नियमों के अनुसार केवल पांच लोगों की अनुमति है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं में सीएम मोहन यादव, पूर्व सीएम शिवराज सिंह, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, और अन्य वरिष्ठ नेता नामांकन के दौरान मौजूद थे। यादव ने कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या यह आयोग की निष्पक्षता को प्रमाणित करेगा।
क्या चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली बना हुआ है ?
कल बुधनी में नामांकन जमा करने के दौरान प्रत्याशी समेत 7 लोग मौजूद थे, जबकि नियम में 5 लोगों की ही अनुमति है, क्या सत्ता और विपक्ष के लिए अलग अलग नियम है ?
सीएम मोहन जी, पूर्व सीएम शिवराज जी, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा जी, प्रत्याशी… pic.twitter.com/LNVUX6w6dW— Arun Subhashchandra Yadav (@MPArunYadav) October 26, 2024
विपक्ष का सवाल: क्या सत्ता और विपक्ष के लिए अलग-अलग नियम?
अरुण यादव ने यह भी कहा कि सत्ता और विपक्ष के लिए भिन्न नियम होना अनुचित है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि आयोग इस पर उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो यह चुनाव की पारदर्शिता पर गहरी शंका उत्पन्न करता है।
आगे की राह: क्या चुनाव आयोग निष्पक्षता साबित कर पाएगा?
अरुण यादव के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट से उपजे विवाद के बाद चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ गया है कि वह नियमों का पालन सुनिश्चित करे। इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि इससे आयोग की निष्पक्षता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।