जर्मनी दौरे पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत भव्यता से किया गया। म्यूनिख में भारत के महावाणिज्य दूत शशत्रुघ्न सिन्हा और इंडियन एसोसिएशन के अध्यक्ष राणा हरगोविंद सिंह ने गर्मजोशी से सीएम का स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जर्मनी और मध्य प्रदेश के बीच संबंधों को और मजबूत करने की योजनाओं पर चर्चा की।
जर्मन भाषा इंस्टीट्यूट की स्थापना
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में जर्मन भाषा के इंस्टीट्यूट खोले जाएंगे। जर्मनी में रोजगार के अवसरों की प्रचुरता है, लेकिन भाषा की दिक्कत कई लोगों के लिए चुनौती बनती है। इसलिए प्रदेश में जर्मन सहित अन्य भाषाओं की शिक्षा प्रदान करने वाले इंस्टीट्यूट शुरू किए जाएंगे।
जर्मनी और एमपी के बीच साझेदारी
डॉ. यादव ने बवेरियन स्टेट चांसलरी के प्रमुख डॉ. फ्लोरियन हेरमैन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा, जर्मनी और मध्य प्रदेश के बीच कुशल मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक का आदान-प्रदान होगा। जर्मनी की तकनीक का उपयोग करके मध्य प्रदेश में औद्योगिक और तकनीकी विकास को गति दी जाएगी।
दौरे की प्रमुख गतिविधियां
28 नवंबर (म्यूनिख):बवेरिया राज्य सरकार के अधिकारियों और कौंसुल जनरल ऑफ इंडिया से बैठक। SFC Energy और बेयरलोचर ग्रुप के कार्यक्रमों में भागीदारी।”इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश” विषय पर संवाद सत्र।
उद्योग प्रतिनिधियों और “फ्रेंड्स ऑफ एमपी” के साथ वन-टू-वन मीटिंग।
29 नवंबर (स्टटगार्ट)
LAPP ग्रुप की फैक्ट्री का दौरा।
निवेश विषय पर राउंडटेबल मीटिंग।
स्टेट म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री का भ्रमण।
प्राकृतिक ऐतिहासिक म्यूजियम का विशेष दौरा होगा।
म्यूजियम का महत्व
1791 में स्थापित यह म्यूजियम डायनासोर के अवशेष और प्राचीन जीवाश्मों का विशाल संग्रह रखता है।
यहां 11 मिलियन से अधिक ऐतिहासिक वस्तुएं संग्रहित हैं।
निवेश बढ़ाने की पहल
सीएम ने विभिन्न उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों से मध्य प्रदेश में निवेश को लेकर चर्चा की। इस दौरान जर्मनी के उद्यमियों को मध्य प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं के बारे में बताया गया।
मुख्यमंत्री का आगे का कार्यक्रम
29 नवंबर की रात: सीएम डॉ. मोहन फ्रैंकफर्ट से नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
जर्मनी दौरे से उम्मीद है कि मध्य प्रदेश में औद्योगिक और शैक्षणिक विकास को नई दिशा मिलेगी।