नई दिल्ली: राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। दो दिवसीय सम्मेलन में रबी सीजन की तैयारियों, कृषि उत्पादन, किसानों की आय, जलवायु अनुकूल खेती और केंद्र-राज्य समन्वय सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कृषि से जुड़े फैसलों में वैज्ञानिक योजना, जमीनी निगरानी और उपलब्ध आंकड़ों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया। सम्मेलन में रबी सीजन के लिए राज्यों की तैयारियों और क्षेत्रवार कृषि जरूरतों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत 10 राज्यों के लिए वित्तीय स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। दिए गए विवरण के अनुसार पश्चिम बंगाल, हरियाणा, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, मिजोरम, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और पंजाब को कुल 1,082 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां दी गईं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्यों को योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए समय पर संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंच सके।
सम्मेलन में बदलते मौसम, अनियमित बारिश और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए फसल योजना तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्र सरकार ने राज्यों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जल प्रबंधन और फसल चयन की रणनीति बनाने को कहा है। इसके अलावा उन्नत बीज, उर्वरक उपलब्धता, फसल सुरक्षा, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
कृषि योजनाओं की निगरानी के लिए केंद्र और राज्यों के बीच नियमित वर्चुअल बैठकें आयोजित करने की बात कही गई। इसके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर कृषि विभाग, वैज्ञानिक संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केवीके, एफपीओ और किसानों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने रियल-टाइम जानकारी के आधार पर फसल स्थिति, रोग प्रकोप और बाजार भाव की निगरानी को भी महत्वपूर्ण बताया है।

कृषि क्षेत्र में मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य पर जोर दिया गया। किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर खाद के इस्तेमाल के लिए जागरूक करने की बात कही गई। दलहन की खेती को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर भी चर्चा हुई।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों से नकली खाद, अमानक बीज और घटिया कीटनाशकों की बिक्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने को कहा। किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट उपलब्ध कराने और कृषि बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए प्राकृतिक खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग और क्रॉप डायवर्सिफिकेशन जैसी पद्धतियों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से कृषि उत्पादन के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग और किसानों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, वैज्ञानिक भंडारण और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई गई। दलहन उत्पादन और खरीद व्यवस्था को मजबूत करने के साथ भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। सम्मेलन में कृषि क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और निर्यातोन्मुख बनाने के उपायों पर विचार किया गया।
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित रणनीति तैयार करने पर जोर रहा। सम्मेलन का मुख्य फोकस रबी सीजन की बेहतर तैयारी, कृषि उत्पादकता, जलवायु अनुकूल खेती, डिजिटल कृषि, बाजार सुधार और किसानों की आय से जुड़े मुद्दों पर रहा।