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जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी, मारा गया मसूद अजहर का भतीजा, पुलवामा हमले में था शामिल

जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। जिसमें सुरक्षाबलों ने दक्षिण कश्मीर के अवंतीपोरा में दो आतंकियों को मार गिराया है। इन दो आतंकियों में से एक की पहचान आतंकी जैश ए मुहम्मद की चीफ मसूद अजहर के भतीजे के रूप में हुई है। जिसका नाम इस्माइल उर्फ लंबू है।

By: Amit ranjan 
Updated:
जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी, मारा गया मसूद अजहर का भतीजा, पुलवामा हमले में था शामिल

नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। जिसमें सुरक्षाबलों ने दक्षिण कश्मीर के अवंतीपोरा में दो आतंकियों को मार गिराया है। इन दो आतंकियों में से एक की पहचान आतंकी जैश ए मुहम्मद की चीफ मसूद अजहर के भतीजे के रूप में हुई है। जिसका नाम इस्माइल उर्फ लंबू है।

अधिकारी ने बताया कि अबू सैफुल्ला, जिसे अदनान, इस्माइल और लंबू के नाम से भी जाना जाता है और वह साल 2017 से घाटी में सक्रिय था। अबू पुलवामा में त्राल के हंगलमर्ग में एक अन्य आतंकवादी के साथ मारा गया है। वह आईईडी एक्सपर्ट था। वह लथपोरा पुलवामा हमले की साजिश में शामिल था और एनआईए की चार्जशीट में भी उसका नाम था। कई आतंकी हमलों में भी उसका हाथ था।

अधिकारी विजय कुमार ने कहा कि, ‘’वह 14 फरवरी, 2019 के पुलवामा हमले सहित अन्य आतंकी हमलों की एक श्रृंखला में शामिल था। अदनान रऊफ अजहर, मौलाना मसूद अजहर और अम्मार के पाकिस्तान स्थित शीर्ष जेएम पदानुक्रम का एक बहुत मजबूत सहयोगी था।” अबू वाहन से चलने वाले आईईडी का विशेषज्ञ था, जिसका अफगानिस्तान में नियमित रूप से उपयोग किया जाता है और 2019 के पुलवामा हमले में भी। अधिकारियों ने कहा कि वह तालिबान से भी जुड़ा था।

एक सुरक्षा डोजियर में कहा गया है कि उसने JeM संगठन को फिर से स्थापित करने और मजबूत करने की कोशिश की। इतना ही नहीं उसने अवंतीपोरा, विशेष रूप से पुलवामा के काकपोरा और पंपोर क्षेत्रों का उपयोग नए आतंकवादी समूहों की भर्ती के लिए किया।

मारे गए दूसरे आतंकी की पहचान बाकी

आपको बता दें कि मोहम्मद इस्माइल कश्मीर में जैश ए मुहम्मद का मुख्य कमांडर था। वह मसूद अजहर का भतीजा था। इस्माइल बहावलपुर के कोसार कॉलोनी का रहने वाला था। पुलवामा में हुए 2020 और 2019 के हमले के मामले में वह शामिल था और सुरक्षाबल की उसपर नजर थी। 2019 में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले में आईईडी का इस्तेमाल किया गया था।

इंटेलिजेंस एजेंसी के डोजियर के मुताबिक अबू सैफुल्लाह का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और आतंकी संगठनों की देखरेख में वह बड़ा हुआ। साल 2017 में उसने भारत में घुसपैठ की और वह अवंतीपोरा, पुलवामा, अनंतनाग में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता था।

अधिकारी विजय कुमार ने कहा, ‘’वह 14 फरवरी, 2019 के पुलवामा हमले सहित अन्य आतंकी हमलों की एक श्रृंखला में शामिल था। अदनान रऊफ अजहर, मौलाना मसूद अजहर और अम्मार के पाकिस्तान स्थित शीर्ष जेएम पदानुक्रम का एक बहुत मजबूत सहयोगी था।” अबू वाहन से चलने वाले आईईडी का विशेषज्ञ था, जिसका अफगानिस्तान में नियमित रूप से उपयोग किया जाता है और 2019 के पुलवामा हमले में भी। अधिकारियों ने कहा कि वह तालिबान से भी जुड़ा था।

एक सुरक्षा डोजियर में कहा गया है कि उसने JeM संगठन को फिर से स्थापित करने और मजबूत करने की कोशिश की। इतना ही नहीं उसने अवंतीपोरा, विशेष रूप से पुलवामा के काकपोरा और पंपोर क्षेत्रों का उपयोग नए आतंकवादी समूहों की भर्ती के लिए किया।

अधिकारी ने यह भी कहा कि दूसरे आतंकवादी की पहचान के ब्योरे का इंतजार है। उन्होंने बताया कि मारे गए आतंकवादियों के पास से एक एम-4 राइफल, एके-47 राइफल, एक ग्लॉक पिस्टल और एक अन्य पिस्टल बरामद किया गया है।

पुलिस ने कहा कि सुरक्षा बलों ने सुबह संयुक्त अभियान शुरू किया और घेराबंदी और तलाशी अभियान के दौरान गोलीबारी शुरू हो गई। सुरक्षा बलों ने इस साल जनवरी से कश्मीर में कुछ शीर्ष कमांडरों सहित कम से कम 87 आतंकवादियों को मार गिराया है।

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