Jagdeep Dhankar Resigns: मानसून सत्र के पहले ही दिन जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद से राजनीती गलियारों में हलचल मच गई है जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने को लेकर तमाम कयास लग रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने अचानक उनके इस्तीफे पर सवाल उठाए हैं। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखे एक पत्र में बताया कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और चिकित्सा सलाह का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत अपने इस्तीफे की पेशकश की है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखे पत्र में जगदीप धनखड़ ने लिखा कि स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं।इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मु को उन्होंने सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद भी दिया। इसके अलावा पीएम मोदी और मंत्रिपरिषद से भी मिले सहयोगों और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
2027 तक था कार्यकाल
धनखड़ का कार्यकाल अगस्त 2027 तक था, यानी उनके पास अभी दो साल से अधिक समय बाकी था. ऐसे में अचानक इस्तीफे ने कई तरह की अटकलों को जन्म दिया. उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्वास्थ्य कारणों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त किया, अब राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यसभा के सभापति का पद रिक्त हो गया है और नए उपराष्ट्रपति की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है. संबंधित विभाग द्वारा जल्द ही गजट अधिसूचना (Gazette Notification) जारी की जाएगी, जिसमें इस्तीफा स्वीकृत किए जाने की आधिकारिक जानकारी दी जाएगी. यह भारत के इतिहास में तीसरा मौका है जब कोई उपराष्ट्रपति कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ रहा है. इससे पहले वीवी गिरि और कृष्णकांत भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे |
विपक्ष इस्तीफे पर सवाल कर रहा है।
विपक्ष इस्तीफे पर सवाल कर रहा है। कह रहा है कि इसकी वजह कुछ और है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को बताया, ’21 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे श्री जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की अध्यक्षता की। इस बैठक में सदन के नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत ज़्यादातर सदस्य मौजूद थे। थोड़ी देर की चर्चा के बाद तय हुआ कि समिति की अगली बैठक
शाम 4:30 बजे फिर से होगी।
शाम 4:30 बजे धनखड़ जी की अध्यक्षता में समिति के सदस्य दोबारा बैठक के लिए इकट्ठा हुए। सभी नड्डा और रिजिजू का इंतज़ार करते रहे, लेकिन वे नहीं आए। सबसे हैरानी की बात यह थी कि धनखड़ जी को व्यक्तिगत रूप से यह नहीं बताया गया कि दोनों मंत्री बैठक में नहीं आएंगे। स्वाभाविक रूप से उन्हें इस बात का बुरा लगा और उन्होंने BAC की अगली बैठक आज दोपहर 1 बजे के लिए टाल दी।
इससे साफ है कि कल दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 4:30 बजे के बीच जरूर कुछ गंभीर बात हुई है, जिसकी वजह से जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने जानबूझकर शाम की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। अब एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए, श्री जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसकी वजह अपनी सेहत को बताया है। हमें इसका मान रखना चाहिए। लेकिन सच्चाई यह भी है कि इसके पीछे कुछ और गहरे कारण हैं। श्री जगदीप धनखड़ का इस्तीफा उनके बारे में बहुत कुछ कहता है। साथ ही, यह उन लोगों की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है, जिन्होंने उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाया था।
वहीं भाजपा सांसद रवि किशन ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कब कौन बीमार पड़ जाए। किसे पता है। उन्होंने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारण बताया है तो उस पर भरोसा करना चाहिए। सांसद रवि किशन ने कहा कि आखिर कैसे किसी की हेल्थ को भी राजनीति का मसला बनाया जा सकता है। रवि किशन ने कहा, ‘विपक्ष किसी की सेहत का मजाक बना रहा है और उस पर राजनीति कर रहा है। आप देख सकते हैं कि स्वस्थ लोग भी अचानक गिर पड़ते हैं मौत हो जाती है।’
जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने को लेकर तमाम कयास लग रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने अचानक उनके इस्तीफे पर सवाल उठाए हैं। वहीं भाजपा सांसद रवि किशन ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कब कौन बीमार पड़ जाए। किसे पता है। उन्होंने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारण बताया है तो उस पर भरोसा करना चाहिए। सांसद रवि किशन ने कहा कि आखिर कैसे किसी की हेल्थ को भी राजनीति का मसला बनाया जा सकता है। रवि किशन ने कहा, ‘विपक्ष किसी की सेहत का मजाक बना रहा है और उस पर राजनीति कर रहा है। आप देख सकते हैं कि स्वस्थ लोग भी अचानक गिर पड़ते हैं मौत हो जाती है।’