भोपाल में आरजीपीवी विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटने और उसका नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। पूर्व युवक कांग्रेस भोपाल ग्रामीण जिला अध्यक्ष गोपिल कोतवाल ने प्रेस वार्ता कर सरकार के इस प्रस्ताव पर गंभीर सवाल उठाए।
गोपिल कोतवाल ने कहा कि आरजीपीवी पिछले 26 वर्षों से प्रदेश की तकनीकी शिक्षा की मजबूत आधारशिला रहा है। उनके अनुसार विश्वविद्यालय का विभाजन होने से शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो सकती है और छात्रों को प्रशासनिक एवं शैक्षणिक स्तर पर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि नए विश्वविद्यालय बनाए जाने पर हर वर्ष 30 से 40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रशासनिक खर्च आएगा। इसके अलावा नई बिल्डिंग और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना जताई गई है।
कोतवाल ने कहा कि आरजीपीवी की करीब 650 करोड़ रुपये की एफडी तीन हिस्सों में बंट जाएगी, जिससे भविष्य में आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने सरकार से पूछा कि नए विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए आवश्यक बजट की व्यवस्था कहां से की जाएगी।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने मांग की कि आरजीपीवी के विभाजन और नाम परिवर्तन का प्रस्ताव तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही सरकार से तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने और छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की गई।