रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: गुरुवार को एक केस की सुनवाई करने के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक टिप्पणी की जिसे आपको जानना चाहिए। आपको बता दें कि एक पति ने अपनी पत्नी की हत्या केवल इसलिए कर दी थी कि वह उसके कहने पर चाय बनाने से मना कर दिया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पत्नी को अपनी संपत्ति मानने की मध्ययुगीन धारणा अभी भी मौजूद है।
इस मामले की सुनवाई कर रही न्यायाधीश रेवती मोहिते ने पति की दलील को खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की। पति ने दलील दी कि उसकी पत्नी ने चाय बनाने से इनकार किया, जिसकी वजह से वह भड़क गया और पत्नी पर हमला कर दिया। जज ने पति के इस तर्क को भद्दा बताया है।
आदेश के अनुसार, संतोष अतकर और उनकी पत्नी के बीच कुछ समय से विवाद चल रहा था। दिसंबर 2013 की बात है। एक दिन पत्नी पति के लिए चाय बनाए बिना ही घर से बाहर जाने की कोशिश की। उस आदमी ने उसे हथौड़े से मारा, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गई।
आपको बता दें इसके बाद संतोष अतकर ने वहां साफ सफाई करवाई। फिर पत्नी को नहाने के लिए कहा और फिर हॉस्पिटल ले गया। करीब एक हफ्ते तक हॉस्पिटल में रहने के बाद उसने दम तोड़ दिया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि अतकर को अपराध करने के लिए उकसाया गया था क्योंकि उसकी पत्नी ने चाय बनाने से इनकार कर दिया था।
कोर्ट ने कहा कि अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने के बाद उसे हॉस्पिटल ले जाने से पहले सबूत नष्ट करने में कीमती समय बर्बाद हुआ। इसलिए वारदात में अनहोनी जैसा कुछ नहीं है। इसलिए अपील खारिज की जाती है।