उज्जैन। साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को ठिकाने लगाने का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया। मोबाइल अपडेट के नाम पर लोगों के बैंक खातों से रकम उड़ाने के बाद आरोपी उसी पैसे से ज्वेलर्स शोरूम से गोल्ड कॉइन खरीदते थे और बाद में उन्हें बेचकर नकदी में बदल देते थे। उज्जैन की माधवनगर पुलिस ने ऐसे ही एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मोबाइल अपडेट के नाम पर लगाते थे चूना
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को मोबाइल अपडेट या केवाईसी अपडेट के नाम पर फर्जी लिंक भेजते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता, आरोपी उसके मोबाइल और बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद बैंक खातों से रकम निकाल ली जाती थी।

ठगी के पैसों से खरीदे जाते थे गोल्ड कॉइन
पुलिस के अनुसार साइबर ठगी से प्राप्त रकम सीधे ज्वेलर्स के क्यूआर कोड पर ट्रांसफर की जाती थी। इसके बदले आरोपी गोल्ड कॉइन खरीदते थे और बाद में उन्हें बेचकर नकद राशि प्राप्त कर लेते थे। इस प्रक्रिया के जरिए साइबर अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।
संदिग्ध ट्रांजेक्शन से खुला मामला
मामले का खुलासा तब हुआ जब उज्जैन स्थित डीपीके गोल्ड शोरूम का बैंक खाता एक संदिग्ध लेनदेन के बाद होल्ड हो गया। शिकायत मिलने पर माधवनगर थाना पुलिस ने जांच शुरू की।सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शहर के होटल हीरा पैलेस से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
तीन आरोपी गिरफ्तार
पकड़े गए आरोपियों की पहचान कशिश, राहुल उर्फ शानू और अनिमेश उर्फ अनुराग के रूप में हुई है, जो नर्मदापुरम जिले के निवासी बताए गए हैं।पूछताछ में आरोपियों ने उज्जैन के चार अलग-अलग ज्वेलर्स शोरूम से गोल्ड कॉइन खरीदने की बात स्वीकार की है।
कई राज्यों में फैला था नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के लोगों को अपना शिकार बना चुका है।आरोपी डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क का भी इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस के अनुसार गिरोह बायनेन्स एप के माध्यम से USDT ट्रेडिंग कर ठगी की रकम को खपाने का प्रयास कर रहा था।
मोबाइल, फर्जी आईडी और दस्तावेज बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, फर्जी पहचान पत्र, गोल्ड खरीद के बिल और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।फिलहाल तीनों आरोपियों से पुलिस रिमांड में पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों और साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
माधवनगर पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है। साथ ही विभिन्न राज्यों की पुलिस और साइबर सेल से भी जानकारी साझा की जा रही है ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल अपडेट, केवाईसी या बैंकिंग संबंधी किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
रिपोर्ट : प्रियंक