बालाघाट। जिले के मालखेड़ी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस इलाके में कभी माओवादियों की गतिविधियों के बावजूद वे डटे रहे, वहां अब बाघ का खौफ उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में लगातार बाघ के हमले की घटनाओं से लोगों में डर बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि शाम होने से पहले ही लोग अपने घरों में लौटने को मजबूर हो जाते हैं। बाघ की दहशत के कारण खेतों में काम करने और मजदूरी के लिए बाहर जाने में भी परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के डर का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। कई लोग बच्चों को स्कूल भेजने में डर महसूस कर रहे हैं। वहीं खेतों में काम और मजदूरी प्रभावित होने से ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार वन क्षेत्र से लगे इलाकों में काम करने वाले लोगों के लिए हर समय बाघ के हमले का खतरा बना रहता है। इसके चलते लोग जरूरी कामों के लिए भी बाहर निकलने से बच रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि मालखेड़ी और आसपास का क्षेत्र पहले नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता था। पूर्व में यहां नक्सलियों की मौजूदगी रही है और एक मुठभेड़ के दौरान पुलिस जवानों ने दो नक्सलियों को मार गिराया था। ग्रामीणों का कहना है कि उस दौर में भी उन्होंने इलाके में रहकर अपनी जिंदगी आगे बढ़ाई, लेकिन मौजूदा समय में बाघ का डर उनके लिए बड़ी चिंता बन गया है।
ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से क्षेत्र में बाघों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीणों को बाघ के खतरे से बचाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन ने उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सुरक्षा और आजीविका दोनों प्रभावित हो रही हैं, इसलिए इस मामले में जल्द कार्रवाई जरूरी है।