आज के दौर में प्रमाणित जैविक खेती के उत्पाद की बहुत ज्यादा डिमांड है। देश से लेकर विदेश तक जैविक उत्पाद 50 से लेकर 300 प्रतिशत तक अधिक दाम पर बिकते हैं। इससे किसानों को अच्छा पैसा मिलता है।
जैविक खेती में प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग होता है, इसलिए पिछले कुछ सालों में जैविक खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ा है, इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकारों ने किसानों को जैविक खेती का प्रमाणपत्र देने के लिए कई जैविक प्रमाणीकरण संस्था की स्थापना की है.
जहां पर किसान प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं, प्रमाणपत्र मिलने के बाद किसान कहीं भी अपने जैविक उत्पाद को बेच कर मुनाफा कमा सकता हैं। लेकिन जैविक खेती के लिए आपको सबसे पहले जैविक प्रमाणिकता सिद्ध करनी पड़ेगी, इसके लिए जरूरी है की खेत की मिट्टी पूरी तरह से केमिकल मुक्त हो, जिससे कि उपज में किसी भी प्रकार का रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अंश ना मिले होने की संभावना पुख्ता हो सके।
अगर आप केमिकल खेती से जैविक खेती की तरफ रूख कर रहें तो,आपको जैविक खेती के प्रमाणीकरण के लिए कुछ बातों पर अमल करना होगा। सबसे पहले जिन खेतों को आपने जैविक खेती के लिए चुना है उन खेतों में लगातार 3 सालों तक केवल जैविक खादों और कीटनाशकों का प्रयोग करना जरूरी है, और साथ ही यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा की बाहर से किसी भी प्रकार का केमिकल अंश खेतों में ना पहुंच सके।
जैविक खेती करने वाले किसानों को इस बात का विशेष ख्याल रखना चाहिए की खेतों से मिल रही उपज का प्रमाणीकरण संस्था से समय-समय पर जांच होता रहे, जिससे की मिल रही उपज में केमिकल की मात्रा की जानकारी मिल सके। जैविक उत्पादन का प्रमाणीकरण कराने के लिए किसान को वार्षिक फ़सल योजना, भूमि दस्तावेज, किसान का पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, फार्म का नक्शा सही कुछ दस्तावेज जैविक प्रमाणीकरण संस्था को उपलब्ध कराना होता है।
प्रमाणीकरण संस्था द्वारा आवेदन पत्र की जांच की जाती है। सही पाए जाने पर आवेदक को निर्धारित निरीक्षण व प्रमाणीकरण शुल्क जमा करना होता है। शुल्क जमा करने पर के बाद संस्था द्वारा आवेदक की खेत का निरीक्षण किया जाता है। खेत के निरीक्षण के बाद सभी चीजें सही पाए जाने के बाद जैविक प्रमाणीकरण संस्था के द्वारा जैविक खेती का सर्टिफिकेट दिया जाता है।
खेत की मिट्टी में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए गोबर से तैयार जैविक खाद, बायोगैस स्लरी, नाडेप कम्पोस्ट, फास्फो कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, नीलहरित शैवाल, एजोला का प्रयोग करना चाहिए। फसल में कीट और रोगों के नियंत्रण के लिए नीम के उत्पादित दवाओं और करंज की पत्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए।