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दिव्यांग किसान का बुलंद हौसला: गुलाब की खेती से हुए मालामाल

By: RNI Hindi Desk 
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दिव्यांग किसान का बुलंद हौसला: गुलाब की खेती से हुए मालामाल

अक्सर हम खेती किसानी में जब कामयाबी की बात करते हैं, तो बड़ी जोत वाले, बड़े किसानों की, बड़ी कामयाबी की चर्चा होने लगती है। इसमें लाखों-करोड़ों की आमदनी और बड़े पुरस्कारों तक की बात हम करने लगते हैं। लेकिन ज़रूरी नहीं, कि हर किसान के पास बड़े खेत हों, छोटे और सीमांत किसान भी, नई तकनीक की ना सिर्फ़ चाहत पाल सकते हैं, बल्कि उसे अपने छोटे खेतों में आजमा भी सकते हैं।

अब जैसे मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के छोटे से गांव बसाड के दिव्यांग किसान नरेश पाटील का उदाहरण देखिए, जो दोहरी सफलता वाला है। एक तो बहुत कम ज़मीन में ज्यादा आय और दूसरी कि अपने पैरों की दिक्कत उन्होंने कभी अपनी खेती के आड़े नहीं आने दी। इसके बावजूद भी सफलता पाई। 

दरअसल आज के दौर में डच रोज की मांग काफी है, और ये धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसकी खेती का पॉलीहाउस में ज़बरदस्त सक्सेस रेट है।

नरेश पाटील ने जानकारी कर इसकी पूरी तकनीक समझी,…बेड बनवाया, थ्रिप्स और माइट जैसे कीटों से बचाव और पौधों के पोषण के लिए सही खाद-फर्टीलाइजर की व्यवस्था की। वो बताते हैं कि इस खेती के मेंटनेंस में 25-30 हज़ार प्रति माह का खर्च भी है। जिसमें लेबर से लेकर पैकिंग तक के खर्चे शामिल हैं।

वो इंदौर मंडी के कॉन्ट्रैक्टर से संपर्क में रहते हैं, जो उनकी उपज की सप्लाई के मुताबिक उन्हें पेमेंट करता रहता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कैसे नरेश को उनके 18 लाख के इस पॉलीहाउस के प्रोजेक्ट में सरकार की तरफ़ से 9 लाख की सब्सिडी मिली। सरकार की ऐसी योजना का लाभ उठाकर कई किसान ऐसी गुलाबी खेती से 5 से 7 हज़ार तक प्रति दिन की आमदनी कर रहे हैं।

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