लखनऊ: उत्तर प्रदेश के हाथरस में जिस तरह से युवती के साथ कथित तौर पर गैंगरेप हुआ और उसके बाद उसकी मौत हो गई, इस घटना को लेकर लोगों में जबरदस्त आक्रोश है।
विपक्ष लगातार योगी सरकार पर इस घटना को लेकर घेरने में जुटा है। विपक्ष के हमले के बीच योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हाथरस की घटना के बाद प्रदेश में हिंसा की साजिश रची गई।
इस मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट के अनुसार ईडी इस बात की जांच करेगा कि क्या इस पूरे विवाद में प्रदेश के भीतर जातीय हिंसा फैलाने के लिए संदिग्ध पैसे का इस्तेमाल किया गया।
ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर लखनऊ जोन राजेश्वर सिंह ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी हाथरस पुलिस द्वारा दायर एफआईआर की जांच कर रही है जिसमे एक ऑनलाइन वेबसाइट का जिक्र किया गया है।
जस्टिस फॉर हाथरस विक्टिम नाम का एक लिंक बनाया गया है, जिसे ऑनलाइन अपलोड किया गया, इस लिंक की संदिग्धता की जांच की जाएगी। अधिकारियों की मानें तो ईडी इस मामले में पीएमएलए एक्ट के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर सकती है।
ईडी इस पूरे मामले में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके हिंसा को भड़काने के लिए फर्जी तरीके से पैसे के लेन देन की जांच कर सकती है। अधिकारी ने बताया कि जो लोग इस मामले में लिप्त होंगे उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
हाथरस पुलिस ने सेक्शन 153ए यानि दो गुटों में तनाव बढ़ाने का केस दर्ज किया है। यह जातीय अपराध है, जिसके तहत पीएमएलए की धाराओं को भी लागू किया जा सकता है।
इस मामले में ईडी अगर पीएमएलए एक्ट के तहत केस दर्ज करती है तो फिर वो विदेशी फंडिंग की जांच कर सकती है। माना जा रहा है कि ईडी ऑनलाइन अकाउंट के जरिए पैसे के लेनदेन की जांच कर सकती है और टेलीकॉम कंपनियों से इन अकाउंट का आईपी अड्रेस भी मांग सकती है।