{ गोरखपुर से प्रदीप आनंद की रिपोर्ट }
रासुका की जद में आया डॉ. कफील विवादित बयानों के चलते पिछले दो साल से शासन की नजर में था। सुर्खियों में रहने के लिए पहले भी उसने कई बार ऐसी हरकत की, जिसकी वजह से जेल जाना पड़ा। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में गिरफ्तारी होने के बाद पहली बार वह चर्चा में आया। इस मामले में करीब नौ माह तक उसे जेल में रहना पड़ा।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिर्वसिटी (एएमयू) में सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार हुुुुआ डा. कफील पहली बार 2013 में दोस्त की जगह मेडिकल की परीक्षा देने के आरोप में जेल गया था। उस समय उसे तीन माह तिहाड़ जेल में बिताने पड़े थे।
आठ अगस्त 2016 को बीआरडी मेडिकल कालेज, गोरखपुर में प्रवक्ता के पद पर उसकी नियुक्ति हुई थी। प्रोबेशन पीरियड में ही उसने 75 मेडिकल अवकाश लिया था। उस समय तत्कालीन विभागाध्यक्ष डा. राजीव शुक्ल ने पत्राचार कर उससे सवाल जवाब किया था। उस समय दिए अपने विवादित बयानों की वजह से डा. कफील चर्चित हुआ था।
10 और 11 अगस्त 2017 को मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत के मामले में शासन के निर्देश पर कराई गई जांच में मेडिकल कालेज के तत्कालीन प्राचार्य डा. राजीव शुक्ल, उनकी पत्नी और डा. कफील सहित तत्कालीन सात कर्मचारियों को दोषी पाया गया था। इस मामले में सभी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था और आरोपितों की गिरफ्तारी भी हुई थी।
इस मामले में डा. कफील को एसटीएफ ने दो सितंबर 2017 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। नौ माह बाद जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद डॉ. कफील हर मौके पर सरकार के खिलाफ विवादित बयान देने लगा।
कैंट पुलिस ने 24 सितंबर 2018 को डॉ. कफील और उनके बड़े भाई आदिल खान को गिरफ्तार किया था। दोनों पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी बैंक खाता खोलने और उससे करीब दो करोड़ रुपये के लेनदेन करने का आरोप है। इस मामले में दो जुलाई 2018 को कैंट पुलिस ने केस दर्ज किया था।