अक्सर आपने देखा होगा तालाब में या जहां भी पानी की उपलब्धता है, वहां आपको बत्तखों का झुंड मिल जाएगा। दरअसल बत्तखपालन के लिए तालाब का होना ज़रूरी नहीं है लेकिन अगर मछली पालन के साथ बत्तखपालन किया जाए तो दोनों में एक दूसरे से सहयोग मिल जाता है, और उत्पादन लागत में काफी कमी आती है।
ऐसा इसलिए कहा गया है, क्योंकि बत्तख तालाब की गंदगी को खाकर उसकी साफ़-सफाई कर देता है। जिससे एक तो मछलियों के लिए तालाब साफ़ सुथरा मिलेगा और बत्तख के आहार पर आपको लगभग 30 प्रतिशत कम खर्च आएगा। बत्तख को 120 ग्राम दाना रोज चाहिए होता है। जिसकी पूर्ति आप मात्र 60-70 ग्राम देकर पूरी कर सकते हैं।
इसके अलावा बत्तख के पानी में तैरने से पानी का ऑक्सीजन लेवल मेंटेन रहता है जो मछलियों के लिए बहुत ज़रूरी है। साथ ही बत्तख के बीट से मछलियों को कुछ भोजन मिल जाता है, यानी आपको उनके आहार पर भी कम खर्च होगा।
जब मछलीपालन के साथ बत्तखपालन करना हो, तो तालाब में मछली के स्पॉन नहीं डालने चाहिए क्योंकि बत्तख उन्हें खा सकते हैं,आपको नुक़सान होगा, इसलिए 1 एकड़ तालाब में 4 से 5 हज़ार फिंगरलिंग डालना चाहिए। इसमें अलग-अलग प्रजाति की मछलियां शामिल हैं।

इन प्रजातियों का भी एक ख़ास अनुपात आपको ज्यादा फायदा दिला सकता है। क्योंकि अलग-अलग प्रजाति की मछलियां तालाब के अंदर अलग-अलग स्तरों पर मौजूद भोजन पर पलती हैं।
वैसे मछलियों के भोजन में सरसों की खली, धान की भूसी, मिनरल मिक्स्चर और बाज़ार में तैयार फीड देनी चाहिए। इन सबको आप बोरे में बंडल बना कर आधा तालाब में डूबोकर लटका सकते हैं। 6 से 9 महीने के अंदर 1 किलो तक की मछलियां हो जाएंगी। 1 एकड़ तालाब से ऐसे में 18-20 क्विंटल मछली का उत्पादन संभव है जिससे पौने दो लाख का शुद्ध मुनाफ़ा होगा।

इसी तरह डेढ़ से 2 स्क्वायर फीट प्रति बत्तख की जगह के अनुसार तालाब के ऊपर या किसी किनारे पर आप उनका आवास बना सकते हैं। इन्हें जानवरों से सुरक्षित रखने के उपाय करें।
अंडों के लिए खाकी कैम्पबेल सबसे अच्छी प्रजाति मानी जाती है। जिनसे साल भर में 250 तक अंडे मिल जाते हैं। 1 एकड़ में आप 250 से 300 बत्तख पाल सकते हैं। खाकी कैंपबेल प्रजाति अंडे देने वाली और इंडियन रेड, रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली प्रजाति है। वैसे इन्हें डक हैपेटाइटिस का टीका ज़रूर लगवाना चाहिए।

तालाब के साथ इस तरह का मछलीपालन,इंटीग्रेटेड फार्मिंग का एक अहम हिस्सा है। तमाम कृषि वैज्ञानिक इस तरह के प्रबंधन को अपनाने पर ख़ासा ज़ोर दे रहे हैं। इस तरह आप खेती के अलावा ऐसे मिश्रित पालन से कम लागत में ज्यादा कमाई कर सकते हैं।