{ फतेहपुर से अरमान खान की रिपोर्ट }
ओवर लोडिंग को लेकर प्रदेश सरकार चाहे जितनी सख्ती दिखा रही हो लेकिन फतेहपुर जिले के अधिकारी सरकार की मंशा को पलीता लगाने में जुटे हुए है।

जिले के हालात यह है कि दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक मे खुलेआम ओवर लोडिंग का खेल जारी है, यहाँ चल रही ओवर लोड गाड़ियों के चलते सरकार का सड़को को गड्ढा मुक्त करने का दावा भी खोखला साबित हो रहा है ओवर लोड गाड़ियों के चलने से शहर के भीतर से गुजरने वाला बाँदा टांडा मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।

इस मार्ग पर इतने बड़े बड़े गड्ढे बन गए है कि इस सड़क से चलना लोगों के लिए मुसीबत भरा काम साबित हो रहा है। तमाम दावों के बावजूद जिले में चल रही मोरंग खदानों से ही धड़ल्ले से ओवर लोडिंग की जा रही है।
जिले के अलावा बाँदा और हमीरपुर की मोरंग खदानों से ओवर लोड मोरंग लादकर प्रतिदिन सैकड़ो गाड़िया जिले की सड़कों से होकर निकल रही है लेकिन उसके बावजूद इन ओवर लोड गाड़ियों पर लगाम लगाने वाला कोई नही है।
कहने को तो एसडीएम एआरटीओ और खनिज अधिकारी की अगुआई में अधिकारियों की एक टीम को ओवर लोडिंग पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी दी गई है लेकिन उसके बावजूद ओवर लोडिंग पर लगाम नही लगा रही है।
कहा तो यहाँ तक जाता है कि ओवर लोड गाड़ियों को पास कराने के लिए पासरों का एक गैंग प्रतिदिन सैकड़ों ओवर लोड गाड़ियों को जिले की सीमा से बाहर निकलवाता है जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में चलने वाले इस खेल में अधिकारियों की भी मिली भगत की बात सामने आती रहती है।

जिले में ओवर लोडिंग रोकने के लिए ललौली थाना क्षेत्र में कुछ दिन पहले बैरियर भी लगाए गए थे लेकिन बैरियर पर तैनात किए गए कर्मचारियों और ओवर लोड गाड़ियां पार कराने वाले पासरों कि मिली भगत सामने आने के बाद इस बैरियर को हटा लिया गया था।
उसके बाद जिले में ओवर लोडिंग का खेल धड़ल्ले से जारी है इस मामले में जिलाधिकारी संजीव सिंह का कहना है कि ओवर लोड गाड़ियों की धर पकड़ करने के लिए अधिकारियों की टीम तैनात की गई है जिसकी सक्रियता के चलते ओवर लोडिंग पर पहले की अपेक्षा अब कभी कमी आई है।

फिर भी अगर ओवर लोडिंग हो रही है तो उस पर रोक लगाई जाएगी जिलाधिकारी ओवर लोड गाड़ियों को रोकने का दावा भले ही कर रहे हो लेकिन फतेहपुर जिले में लगभग सौ किलोमीटर चलने के बाद ओवर लोड गाड़िया दूसरे जिले की सीमा में प्रवेश करते है उसके बावजूद ओवर लोड गाड़ियों पर किसी अधिकारी की नजर क्यों नही पड़ती यह अपने आप मे बड़ा सवाल बन गया है।