बालाघाट जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही किसान खरीफ सीजन की तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन सहकारी समितियों के माध्यम से मिलने वाली खाद की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण किसानों में चिंता का माहौल है। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
किसानों ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार उनकी आय दोगुनी करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर खाद, बिजली, पानी, डीजल और कृषि उपकरणों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे खेती करना और अधिक महंगा होता जा रहा है, जबकि फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत और कम आमदनी के कारण वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। महंगाई का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है और किसान परिवारों का जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसान लगातार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

किसानों ने मांग की है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराई जाए। साथ ही कृषि कार्य के लिए बिजली और सिंचाई पानी रियायती दरों पर दिया जाए। उन्होंने सरकार से किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को कम करने के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने की भी मांग की।
किसानों ने यह भी कहा कि सरकार को चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करना चाहिए, जिसमें धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये और गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये तय करने की बात कही गई थी। किसानों का कहना है कि इन वादों के पूरा होने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।