तमिलनाडु में कोलार जिला के ग्रामीणों ने और तीर्थहल्ली के एक युवा उद्यमी ने किसानों की मदद के लिए फसल की प्रोसेसिंग करके एक मिसाल पेश की है।
दरअसल इस किसान ने सोचा कि मक्का वैसे तो 18 से 20 रुपए किलो बिकता है और उसका आटा 25 रुपए किलो तक बिकता है।
लेकिन अगर मक्के को पकने से पहले ही कच्ची मक्का की हार्वेस्टिंग कर ली जाए तो किसानों को और भी फायदा होगा।
कच्ची मक्का की प्रोसेसिंग से आप स्वीट कॉर्न के अलावा और भी बहुत से उत्पाद बना सकते है। इसके बाद उन्होंने लॉकडाउन के दौरान ही एक बैरिंग और कुछ स्टेल की प्लेट आदि लगाकर मक्के के दाने निकालने वाली मशीन तैयार कर ली।
इसकी कुल लागत 20 हज़ार रुपये आई जो की चीन में ढाई लाख की है। इसके अलावा उनकी प्रोसेसिंग मशीन में मक्के के इन दानों से दूध निकाला गया।
उन्होंने इसमें कुछ मात्रा पानी, गाय का दूध मिलाया और इसे गर्म किया। गर्म करते समय उन्होंने दाने निकलने के बाद बचे उसके डंठल और छिलकों को भी साफ़ करके इसमें डाल दिया ताकि मक्की का फ्लेवर रहे।
उन्होंने एक 200 मिली की बोतल को 20 रुपये में बेचा। उन्होंने अपने पास में एक दुकानदार को इस दूध की 35 बोतल पैक करके दी, जो हाथ की हाथ बिक गईं।