Home Madhya Pradesh ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन के नाम है ऐसा रिकॉर्ड जिसे तोड़ पाना मुश्किल, जानिए उनसे जुड़ी रोचक बातें

ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन के नाम है ऐसा रिकॉर्ड जिसे तोड़ पाना मुश्किल, जानिए उनसे जुड़ी रोचक बातें

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रिपोर्ट: सत्य़म दुबे

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे भी पुरोधा हैं, जिनको लोग अपना आदर्श मानते हैं। चाहे डॉ राजेंद्र प्रसाद हों, लाल बहादुर शास्त्री हो,याफिर अपने दमदार भाषण से सबका दिल जीत लेने वाले अटल बिहारी वाजपेयी हो, आज हम इन लोगो की बातें इसलिए कर रहें हैं कि इसी कड़ी में एक और नाम जुड़ता हुआ दिख रहा है, और वो नाम है ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन का, सुमित्रा महाजन का 12 अप्रैल को जन्मदिन है। आइये जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें…

भारतीय राजनीति में सुमित्रा महाजन साल 2014 में मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में लोकसभी अध्यक्ष बनीं थी। केंद्र में लहर किसी का भी रहा हो, लेकिन इंदौर की जनता ने सुमित्रा महाजन को लगातार 8 बार चुनकर संसद भेजा था। मीरा कुमार के बाद सुमित्रा महाजन देश दूसरी महिला बनीं, जिनको लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया। इस साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन्हे पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

आइये जानते हैं इनके राजनीतिक कार्यकाल के बार में…

12 अप्रैल साल 1943 को महाराष्ट्र के चिपलुन में जन्मी सुमित्रा महाजन के पिता संघ के प्रचारक थे। मिली जानकारी के मुताबिक 22 साल की उम्र में उनकी शादी इंदौर में एडवोकेट जयंत महाजन से हुआ था।

आपको बता दें कि सुमित्रा महाजन के राजनीतिक सफर की शुरूआत 80 के दशक में हुई थी। वे पहली बार इंदौर नगर निगम के लिए पार्षद चुनी गई। इसके बाद में उन्हें इंदौर का उपमहापौर भी बनाया गया। सुमित्रा महाजन को इंदौर-3 विधानसभा सीट से वे पहली बाहर विधानसभा के चुनावी मैदान में उतरी, लेकिन उन्हें कांग्रेस के महेंश चंद्र जोशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा, जो उनके राजनीतिक जीवन की एक मात्र हार थी।

साल 1980 में उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी के खिलाफ चुनाव लड़ाया गया। सुमित्रा महाजन ने उन्हें चुनाव हराकर पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता। सुमित्रा महाजन अपनी साफ सुथरी छवि वो देश की एकमात्र महिला सांसद हैं, जो साल 1989, 1991, 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में वह लगातार 8 चुनाव एक ही पार्टी और एक ही लोकसभा क्षेत्र इंदौर से जीती।

16वीं लोकसभा के दौरान नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में उनके राजनीतिक अनुभव और वरिष्ठता को सम्मान देते हुए लोकसभा का अध्यक्ष बनाया गया था। साल 2019 के आम चुनाव में उन्होने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।

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