प्रदेश में महिला और बाल सुरक्षा को लेकर लगातार गंभीर होते हालातों के मद्देनज़र मध्य प्रदेश पुलिस ने एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत पुलिस अधिकारी स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्राओं को महिलाओं के खिलाफ अपराधों, POCSO एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) और धर्मांतरण विरोधी कानूनों की जानकारी दे रहे हैं।
अभियान का उद्देश्य छात्राओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि वे किसी भी आपराधिक गतिविधि का शिकार होने पर डर या संकोच के बिना आगे आकर पुलिस की मदद ले सकें। पुलिस के मुताबिक, कई बार छात्राएं जानकारी के अभाव में चुप रहती हैं, जिससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और वे दोबारा अपराध करने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से यह पहल की जा रही है।
पुलिस की टीम स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्राओं को यह भी सिखा रही है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत कैसे दी जाए, हेल्पलाइन नंबर का उपयोग कैसे किया जाए और किस तरह से कानूनी कार्रवाई शुरू कराई जा सकती है।

अभियान में महिला पुलिसकर्मियों को भी शामिल किया गया है ताकि छात्राओं में भरोसा पैदा किया जा सके और वे बेहिचक अपनी समस्याएं साझा कर सकें। वहीं मनोवैज्ञानिकों को भी अभियान में जोड़ा गया है, जो छात्राओं को मानसिक रूप से मज़बूत बनाने और आत्मरक्षा के टिप्स देने का काम कर रहे हैं।
धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर भी छात्राओं को बताया जा रहा है कि अगर किसी व्यक्ति द्वारा दबाव, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की जाए तो यह अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान फिलहाल शहरी इलाकों में चलाया जा रहा है, लेकिन भविष्य में इसे ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल-कॉलेजों तक भी पहुंचाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्राओं को लाभ मिल सके।
विद्यालयों और कॉलेजों के प्रबंधन ने इस पहल का स्वागत किया है और कहा कि इससे छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपने हक की रक्षा करने में सक्षम होंगी। यह अभियान महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के क्षेत्र में एक अहम कदम माना जा रहा है।






