{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }
प्रकृति ने जिस प्रकार हज़ारों परिंदे पैदा किये उसी प्रकार हज़ारों लाखो जीव भी पैदा किये है। इसके अलावा अलग अलग देशों में अलग अलग जीव पैदा होते है। ये सब ईश्वर के द्वारा बनायी गयी ऐसी सृष्टि है जिसके द्वारा वो संसार का संचालन करते है।
जैसे अगर आप कोरोना को देखे तो भी वह नेचुरल ही बताया जा रहा है। माना जाता है कि वुहान में भी जीव जंतुओं के साथ क्रूरता हुई और इस वायरस का जन्म हो गया। अब पूरी दुनिया उसका इलाज़ खोजने में लगी है।

वेदों के अनुसार ऐसी कई जड़ी बूटियाँ है और वनस्पति है जिनके बारे में सिर्फ उनके जानकारों को ही ज्ञान होता है। इस हिसाब से हम ये समझ सकते है कि प्रकृति की हर चीज़ अनमोल है।
इसको हम ऐसे समझ सकते है कि जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी तो सुषेण वैद्य जी ने जड़ी बूटी के रूप में संजीवनी बूटी बताई। वो एक पहाड़ पर ही लगती थी लेकिन बड़े बड़े शक्तिशाली लोग भी उसे नहीं जान पाए लेकिन एक वैद्य जानते थे।
इसलिए ज़रूरी नहीं है कि हर किसी को हर चीज़ का ज्ञान हो लेकिन अगर देखा जाए तो इस प्रकृति में भंडार छुपा है लेकिन उसे समझने वाले नहीं है। अगर देखा जाए तो कोरोना की भी कोई जड़ी बूटी जरूर होगी लेकिन उसे कौन समझेगा ? जो प्रकृति को जानता हो।