रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: बंगाल टाइगर BCCI अध्यक्ष सौरभ गांगुली गुरुवार को अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं। गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम के एक ऐसे खिलाड़ी रहें हैं, जिनको प्रेरणा लेकर आक के कई युवा खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा हैं। ऑफ साइड के भगवान कहे जाने वाले गांगुली ने ‘क्रिकेट का मक्का’ कहे जाने वाले लॉर्ड्स’ पर टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। आते हीं गांगुली ने बता दिया था कि टीम की दशा और दिशा बदल जायेगी। उन्होने पदार्पण मैच में ही शानदार शतक जड़ा था। इसके के बाद करियर के दूसरे मैच में भी शानदार शतक जड़कर अपने बल्लेबाजी से सभी को हैरान कर दिया था।

वैसे तो गांगुली के क्रिकेट जीवन के कई ऐसे किस्से हैं, जिसे जानकर आप का भी सीना गर्व से चौड़ा हो जायेगा। लेकिन आज हम आपको बताते हैं उस मैच की जिसमें उन्होने लॉर्ड्स की बालकनी में अपनी टी-शर्ट उतार दी थी। दिन था 13 जुलाई सन 2002 को इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर भारत और इंग्लैंड के बीच नेटवेस्ट सीरीज का फाइनल खेला गया। दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में जैसे ही जहीर खान और मोहम्मद कैफ ने जीत का रन पूरा किया, मैदान में मानो बिजली-सी दौड़ गई। एंड्रयू फ्लिंटॉफ तो हताश होकर पिच पर ही बैठ गए। जबकि दूसरी ओर, लॉर्ड्स की बालकनी में इंडियन कैप्टन गांगुली ने अपनी टी-शर्ट उतारी और ऐसे लहराई कि यह वाकया इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

आपको बता दें कि गांगुली ने ऐसा कर एंड्रयू फ्लिंटॉफ को जवाब दिया था। इंग्लिश ऑलराउंडर ने उसी साल फरवरी 3 फरवरी 2002 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत से जीत के बाद अपनी शर्ट निकालकर मैदान में दौड़ लगाई थी। जिसके बाद दादा ने भी ठान लिया था बदला लेने का। बदला चुकाने का लॉर्ड्स से बड़ी जगह और कुछ नहीं हो सकती थी। दादा ने बालकनी से शर्ट लहराकर वानखेड़े का बदला लिया था।

सौरव गांगुली की अगुवाई में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को एक रोमांचक मुकाबले में उसी धरती पर हराकर फाइनल के खिताब पर कब्जा जमाया था। इंग्लैंड ने भारत के सामने जीत के लिए 326 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। भारत के पांच विकेट महज 146 रन पर ही गिर गए थे। लेकिन युवराज सिंह (69) और मोहम्मद कैफ (नाबाद 87) ने शानदार बल्लेबाज कर टीम इंडिया को तीन गेंदें शेष रहते दो विकेट से रोमांचक जीत दिलाने में बेहद हम रोल निभाया था।

आपको बता दें कि ये वो मैच था, जब भारत ने दिखाया कि अब भारतीय टीम न सिर्फ विदेशों में खेल सकती है, बल्कि जीत भी सकती है। सौरव गांगुली ही वह नाम है, जिसने भारतीय क्रिकेट को लड़ना सिखाया, टीम जब मैच फिक्सिंग जैसे गंभीर आरोपों से घिरी हुई थी। उस वक्त गांगुली ने कप्तानी संभाली और खिलाड़ियों में नया जोश भरा। गांगुली ही एक ऐसे कप्तान रहें जिन्होने भारतीय क्रिकेट को कई बड़े खिलाड़ी दिए।

सौरव गांगुली की दी देन है कि नीचले क्रम में बल्लेबाजी कर रह सहवाग को सलामीं बल्लेबाजी कराई। जिसके बाद सहवाग को दुनिया के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज के रुप में पहचान मिली। इतनी ही नहीं विदेशी दौरे पर वीरेंद्र सहवाग के चयन को लेकर गांगुली एक बार अड़ गए थे। कहा जा रहा था कि सहवाग बाउंसर्स नहीं झेल पाएंगे। तब गांगुली ने कहा था कि बिना मौका दिए किसी को जज नहीं कर सकते.. और इसी के बाद अपनी पहली ही विदेशी दौरे में सहवाग ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शतक लगा दिया। दरअसल, सहवाग का वह टेस्ट डेब्यू में शतक था।

इसके बाद गांगुली ने महेंद्र सिंह धोनी का करियर संवारने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने न सिर्फ धोनी की प्रतिभा को पहचाना, बल्कि निचले क्रम पर बल्लेबाजी करने वाले धोनी को तीसरे नंबर पर उतारा और टीम इंडिया को नया विकेटकीपर बल्लेबाज दे दिया।

आपको बता दें कि सौरव गांगुली बता चुके हैं कि, ‘ दिसंबर 2004 में जब धोनी टीम में आए, तो शुरुआती चार मैचों में नंबर 7 पर खेले थे। हम विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के खिलाफ खेल रहे थे, टीम घोषित हो चुकी थी। धोनी एक बार फिर नंबर 7 पर थे। मैंने उनसे कहा कि MS आपको नंबर 3 पर उतरना है.’ फिर क्या था धोनी ने पाकिस्तान के खिलाफ 148 Jनों की धुआंधार पारी खेली थी और स्टार बनकर उभरे। इतना ही नहीं भारतीट टीम 2011 में विश्व विजेता बनाया।