देश की राजनीति में भले पूर्वोत्तर की चर्चा बस स्थानीय चुनावों के वक्त ही ज्यादा होती हो लेकिन यहां की अनुपम प्राकृतिक छटा की चर्चा सदाबहार है। खेती-किसानी में भी कई अलग तरह की फ़सल के लिए इस इलाक़े को जाना जाता है।
ऐसी ही एक फ़सल है घोस्ट चिली,जिसे भारत में भूत झोलकिया के नाम से जाना जाता है। इस फ़सल के नाम से ही आप अंदाज़ा लगा सकते हैं,.कि ये दुनिया की सबसे तीखी मिर्च है। घोस्ट चिली मिर्च को पूरी दुनिया में सबसे तीखी और तेज़ मिर्च के रूप में वर्ष 2007 में गिनीज बुक ऑफ रिकॉडर्स में भी दर्ज किया गया है।

ऐसा इसलिए क्योंकि सामान्य मिर्च की तुलना में, भूत झोलकिया मिर्च में 400 गुना ज्यादा तीखापन होता है। भारत में भूत झोलकिया मिर्च की खेती असम, नागालैंड और मणिपुर में होती है। ये मिर्च इतनी तीखी होती है, कि जीभ पर इसका स्वाद लगते ही, व्यक्ति का दम घुटने लगता है, और आंखों में तेज़ जलन होती है।
भूत झोलकिया मिर्च का इस्तेमाल सिर्फ़ खान-पान के लिए ही नहीं होता, बल्कि देश के सुरक्षा बल उपद्रवियों के खिलाफ भी इसे इस्तेमाल करते हैं। सीमा सुरक्षा बल यानि बीएसएफ की कुछ टियर स्मोक यूनिट इस मिर्च के इस्तेमाल से आंसू गैस के गोले बनाती है। ये आंसू गैस के गोले उपद्रवियों को अलग-थलग करने के काम आते हैं।

सिर्फ इतना ही नहीं, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते शारीरिक हमलों की घटनाओं पर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भूत झोलकिया का इस्तेमाल किया। इस संगठन ने भूत झोलिकया मिर्च से मिर्च स्प्रे विकसित किया। DRDO की तेजपुर यूनिट ने इस मिर्च स्प्रे को तैयार किया, जिसे महिलाएं आत्मरक्षा के लिए उपयोग कर सकती हैं, हालांकि ये मिर्च स्प्रे घातक नहीं है।

भूत झोलकिया मिर्च के मेडिसिनल फायदे भी हैं। इसमें मौजूद एक प्रमुख घटक कैप्साइसिन, को स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद पाया गया है। इससे कैंसर का इलाज भी ढूंढ़ा जा रहा है। कुछ रिसर्च में ये प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओ और फेफड़ों के कैंसर की कोशिकाओ को मारने में सक्षम पाया गया है। साथ ही यह ल्यूकेमिया सेल्स के विकास को भी रोकती है।
ये अस्थमा के इलाज में भी कारगर पाई गई है। यहां तक कि देश के कई हिस्सों में इस मिर्च से बने पाउडर से पेट की कई बीमारियो का इलाज भी किया जाता है। इसके अलावा कैप्साइसिन गठिया में होने वाले दर्द, ब्लड प्रेशर, मांसपेशियों के दर्द और तनाव, मोच में भी फायदेमंद पाया गया है।

एक सीजन में एक पौधे से लगभग 15-20 पूर्ण आकार के फल और 10-14 छोटे फल की उपज मिलती है। इस मिर्च के ताजा फल की औसत उपज 80 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आसपास है। जबकि इसे सुखाने पर, औसत उपज 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिलती है।
पूर्वोत्तर के ज्यादातर इलाक़े में इसका कारोबार ताजा मिर्च के रूप में होता है। कुछ सीमित इलाक़ों में ही सूखी उपज का कारोबार होता है। अच्छी क्वालिटी की सूखी झोलकिया मिर्च काफी ऊंची क़ीमत पर बिकती है। जिसकी औसत क़ीमत 2000 रुपए प्रति किलो तक है।