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चार साल से चक्कर, फिर भी नहीं मिली ट्राइसाइकिल, सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त विकलांग

बुरहानपुर में दिव्यांग मनोज महाजन 4 साल से ट्राइसाइकिल के लिए भटक रहे हैं, जनसुनवाई में भी सिर्फ आश्वासन मिला, व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े।

By: RNI Hindi Desk 
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चार साल से चक्कर, फिर भी नहीं मिली ट्राइसाइकिल, सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त विकलांग

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के ग्राम बोर्सल से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जहां दिव्यांग मनोज मधुकर महाजन पिछले चार वर्षों से ट्राइसाइकिल के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें यह बुनियादी सुविधा नहीं मिल सकी। उनके लिए ट्राइसाइकिल केवल एक साधन नहीं, बल्कि जीवन को आगे बढ़ाने का जरिया है, फिर भी हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला।

हाल ही में वे एक बार फिर जनसुनवाई में पहुंचे, लेकिन परिणाम वही रहा “जल्द मिलेगी” का वादा। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि Social Justice Department के कार्यालय परिसर में ट्राइसाइकिल धूल खाती नजर आईं, जबकि अधिकारी स्टॉक न होने का दावा करते रहे। इससे व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रियांक ठाकुर ने इसे सिस्टम की विफलता बताया और कहा कि यदि संसाधन उपलब्ध हैं तो उनका लाभ जरूरतमंद तक क्यों नहीं पहुंच रहा। वहीं जिला अधिकारी Durgesh Dubey ने सफाई देते हुए कहा कि ट्राइसाइकिल का स्टॉक फिलहाल उपलब्ध नहीं है और सांसद कार्यालय को मांग भेजी गई है।

यह मामला सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और लापरवाही को उजागर करता है, जहां एक जरूरतमंद व्यक्ति वर्षों से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है। अब देखना होगा कि मनोज को उनका हक कब तक मिल पाता है।

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