विभाग ने कहा कि करदाता डेक्लेरेशन में तब तक संशोधन कर सकते हैं, जब तक कर प्राधिकारी बकाया और टैक्स पेमेंट की पूर्ण जानकारी के साथ सर्टिफिकेट जारी नहीं कर देते। दरअसल, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने बार-बार पूछे जाने वाले सवालों (FAQs) की एक नई लिस्ट जारी की है। इसमें बोर्ड ने कई सवालों के जवाब दिये हैं। आइए जानते हैं कि इस लिस्ट से क्या जानकारी सामने आई है।
सीबीडीटी ने कहा कि आयकर निपटान आयोग के समक्ष कार्यवाही पेंडिंग होने की स्थिति में या आईटीएससी के आदेश के खिलाफ याचिका दायर होने की स्थिति में विवाद से विश्वास योजना का लाभ नहीं लिया जा सकता है।
सीबीडीटी ने साथ ही स्पष्ट किया कि जिन मामलों में द्विपक्षीय समझौता प्रक्रिया (Mutual Agreement Procedure-MAP decision) समाधान पेंडिंग है अथवा करदाता ने द्विपक्षीय समझौता प्रक्रिया के फैसले को स्वीकार नहीं किया है, तो ऐसी अपील विवाद से विश्वास योजना के अंतर्गत की जा सकेंगी। ऐसे मामलों में ब्योरा देने वाले को MAP आवेदन और अपील दोनों वापस लेने होंगे।
आयकर विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि एक करदाता (Taxpayers) उन मामलों में डेक्लेरेशन करने के लिये पात्र होंगे, जहां एडवांस रूलिंग प्राधिकरण (Authority for Advance Ruling) ने करदाताओं के पक्ष में फैसला सुनाया है और विभाग ने हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है और करदाता की कुल आय का निर्धारण AAR के समक्ष हो गया है।
यहां बता दें कि सरकार ने कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए अक्टूबर में तीसरी बार विवाद से विश्वास योजना के तहत भुगतान की समयसीमा तीन महीने 31 मार्च, 2021 तक के लिये बढ़ाई है। हालांकि, योजना का लाभ लेने वालों को डेक्लेरेशन 31 दिसंबर, 2020 तक जमा कराना है।