यूपी में तीन महीने के लिए टला निजीकरण का फैसला, सीएम योगी के हस्तक्षेप पर बनी सहमति
लखनऊ : पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण के विरोध में लाखों बिजली कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे, जिससे राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में बत्ती गुल हो गई और बिजली, पानी न मिलने से लोगों में हाहाकार है।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को पीछे हटना पड़ा है। सरकार ने फिलहाल तीन महीने के लिए बिजली विभाग को निजी हाथ में सौंपने का फैसला टाल दिया है।
इस फैसले के बाद बिजलीकर्मियों की अनिश्चित कालीन हड़ताल को कर्मचारी संगठनों ने वापस ले लिया है। जिसके बाद बिजली कर्मचारियों ने अपने काम पर लौटना शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री आवास समेत अन्य मंत्रियों, विधायकों के आवास की बिजली गुल हुई तो वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी। जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर आपात बैठक बुलाई।
बैठक में फैसला वापस लेने के दौरान सरकार की ओर से वितरण क्षेत्र को भ्रष्टाचार से मुक्त करने, बिलिंग व कलेक्शन एफिशिएंसी लक्ष्य प्राप्त करने, उपभोक्ताओं को संतुष्ट करने के साथ ही उपकेंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने में संघर्ष समिति सहयोग करेगी।
इस दौरान यह भी प्रस्ताव दिया गया कि समिति द्वारा 15 जनवरी तक सुधार के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही कई और प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।
फैसला टलने के बाद बिजली नेताओं ने जीत का जश्न मनाया। उन्होंने कहा कि हमने संघर्ष किया और हमारी जीत हुई। बता दें कि बीते 48 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के कई जिले बिजली कटौती से बुरी तरह प्रभावित हुए।
गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, बस्ती, बलिया समेत कई शहरों में बिजली कटौती से लोग परेशान हुए। हालांकि ताजा जानकारी के मुताबिक, इन शहरों के ज्यादातर इलाकों में बिजली सप्लाई फिर से शुरू हो गई है।