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ओजोन परत पर संकट: बढ़ती गर्मी और CFC उत्सर्जन से बढ़ी चिंता

गोरखपुर में ओजोन परत के संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों ने जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है। बढ़ते तापमान और कूलिंग उपकरणों के इस्तेमाल के बीच CFC जैसे ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के प्रभाव को कम करना जरूरी बताया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक ओजोन परत को नुकसान पहुंचने से मानव स्वास्थ्य, फसलों और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।

By: Nivedita 
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ओजोन परत पर संकट: बढ़ती गर्मी और CFC उत्सर्जन से बढ़ी चिंता

गोरखपुर। धरती को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से बचाने वाली ओजोन परत को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। बढ़ते तापमान और कूलिंग उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ओजोन परत के संरक्षण को लेकर जागरूकता जरूरी बताई जा रही है।

क्या है ओजोन परत?

ओजोन तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बनी गैस है, जिसे O₃ कहा जाता है। यह वायुमंडल के स्ट्रैटोस्फीयर में मौजूद रहती है और सूर्य की हानिकारक UV किरणों को रोककर धरती पर जीवन की रक्षा करती है। इसके क्षरण से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

CFC गैस से ओजोन को नुकसान

ओजोन परत के क्षरण के प्रमुख कारणों में क्लोरोफ्लोरोकार्बन यानी CFC जैसे रसायन शामिल हैं। इनका इस्तेमाल पुराने एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर समेत कई कूलिंग उपकरणों में किया जाता था। इन पदार्थों के वायुमंडल में पहुंचने से ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाली रासायनिक प्रक्रिया होती है।

 

सेहत और पर्यावरण पर असर

ओजोन परत के कमजोर होने से UV किरणों का ज्यादा प्रभाव पृथ्वी तक पहुंच सकता है। इससे त्वचा संबंधी बीमारियों, त्वचा कैंसर और आंखों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा पौधों, फसलों और पारिस्थितिकी तंत्र पर भी इसका असर पड़ सकता है।

पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने की जरूरत

गोरखपुर विश्वविद्यालय में AQAC से जुड़े अजय सिंह का कहना है कि बढ़ती गर्मी के साथ कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में पुराने उपकरणों से होने वाले रेफ्रिजरेंट रिसाव को रोकना और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने ओजोन संरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। ओजोन परत की सुरक्षा के लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत दुनिया भर में ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के इस्तेमाल को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के प्रयासों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

 

रिपोर्ट – अंकित श्रीवास्तव 

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