पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय बांध, रुंझ बांध और सिंगरौली–ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित परिवारों का चिता आंदोलन चौथे दिन भी जारी रहा। भीषण गर्मी के बीच बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार आंदोलन में शामिल हुए। आदिवासी महिलाएं अपने बच्चों के साथ प्रदर्शन में पहुंचीं और पानी के बीच चिताओं पर लेटकर विरोध दर्ज कराया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने कहा कि प्रभावित परिवारों ने परियोजनाओं का विरोध नहीं किया था, बल्कि ग्रामसभा की प्रक्रिया, उचित मुआवजा, पारदर्शिता और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग की थी। उनका आरोप है कि कई मामलों में प्रभावित लोगों की मांगों और कानूनी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई गांवों में जलस्तर बढ़ने से घर डूब गए हैं और कुछ मकान क्षतिग्रस्त होकर गिर रहे हैं। इसके बावजूद अनेक परिवारों को अभी तक जमीन और मकान का पूरा मुआवजा नहीं मिला है। प्रभावितों का कहना है कि पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना घरों और गांवों के डूब क्षेत्र में आने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक पहले प्रभावित परिवारों के लिए 5 लाख रुपये के पुनर्वास पैकेज की व्यवस्था थी। आंदोलनकारियों का दावा है कि जुलाई में हुए आंदोलन के बाद 12.50 लाख रुपये के पुनर्वास पैकेज से जुड़ा निर्णय सामने आया था, लेकिन कई परिवारों को अभी तक पुरानी निर्धारित राशि का भी भुगतान नहीं हुआ है। प्रभावित किसानों ने जमीन के रिकॉर्ड में सिंचित भूमि को असिंचित दर्ज किए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इससे मुआवजे की राशि प्रभावित हुई और अंतर की राशि का भुगतान भी लंबित है।

चिता आंदोलन में केन-बेतवा लिंक परियोजना के साथ मझगाय बांध, रुंझ बांध और सिंगरौली–ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास की समस्याएं समान हैं।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पूर्व में धरना-प्रदर्शन रोकने के लिए निषेधात्मक कार्रवाई की गई और आंदोलनकारियों पर मामले दर्ज किए गए। इसके बावजूद प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। अमित भटनागर का कहना है कि प्रभावित परिवारों की मांग केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके अनुसार यह उनके घर, जमीन, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा मामला है। आंदोलनकारियों ने सरकार से लंबित मुआवजे का भुगतान और प्रभावित परिवारों के उचित पुनर्वास की मांग की है।