रतलाम। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि समेत कृषि, सिंचाई, बिजली और राजस्व से जुड़ी 37 मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तैयार किया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि कलेक्टर से सीधे मुलाकात के बाद ही ज्ञापन सौंपेंगे।
किसानों के कलेक्ट्रेट पहुंचने के समय कलेक्टर कार्यालय में मौजूद नहीं थे। इसके बाद किसान कलेक्ट्रेट परिसर में ही बैठ गए और कलेक्टर के आने का इंतजार करने लगे। करीब दो घंटे तक इंतजार के बाद भी मुलाकात नहीं होने पर किसानों ने वहीं हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।
किसानों के धरने की सूचना मिलने पर डिप्टी कलेक्टर संजय शर्मा और नायब तहसीलदार रामचंद्र पांडेय मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने किसानों से ज्ञापन लेने का प्रयास किया, लेकिन किसानों ने ज्ञापन देने से मना कर दिया।किसानों का कहना था कि वे जिले की समस्याओं को लेकर कलेक्टर से चर्चा करने आए हैं। उनका कहना था कि कलेक्टर से मुलाकात के बाद ही ज्ञापन सौंपा जाएगा। किसानों ने यह भी कहा कि जब तक उनकी कलेक्टर से बातचीत नहीं होती, वे कलेक्ट्रेट से नहीं हटेंगे।
किसानों के कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले कलेक्टर अजय कटेसरिया के बैठक के बाद कार्यालय से बाहर जाने की बात सामने आई। कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर किसानों ने नाराजगी जताई। किसानों ने कहा कि फसल खराब होने के बाद उन्हें बीमा और राहत राशि के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने अधिकारियों से किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनके समाधान की मांग की। किसानों ने यह भी कहा कि यदि कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आए तो वे कलेक्ट्रेट परिसर में ही भोजन बनाकर आंदोलन जारी रखेंगे। बाद में अपर कलेक्टर बृजेंद्र रावत कलेक्ट्रेट पहुंचे और किसानों से बातचीत की।

भारतीय किसान संघ की ओर से सौंपे जाने वाले ज्ञापन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित मांगों को प्रमुखता से शामिल किया गया। किसानों ने बीमा दावों के भुगतान में पारदर्शिता की मांग की। साथ ही केला और मिर्च जैसी फसलों को भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में शामिल करने की मांग रखी गई। ज्ञापन में सोयाबीन की समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए पंजीयन शुरू करने और खरीफ की प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा धान, मक्का, ज्वार और अन्य फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, किसान योजनाओं की जिला स्तर पर निगरानी और कृषि, सिंचाई, बिजली तथा राजस्व संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग की गई।
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष पालीवाल के अनुसार, पिछली बार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले को लगभग 213 करोड़ रुपये की राहत राशि मिली थी। इस बार करीब 42 करोड़ रुपये की राशि मिलने की बात कही जा रही है। उनका दावा है कि जिले की 15 ग्राम पंचायतों में बीमा राशि पहुंची है, जबकि 55 ग्राम पंचायतों के किसानों को राशि नहीं मिली है। किसानों ने सोयाबीन की राहत राशि से जुड़े पुराने सर्वे का दोबारा मिलान कराने और पात्र किसानों को बीमा राशि उपलब्ध कराने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में पेयजल की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। किसानों का कहना था कि दूर-दराज के इलाकों से अपनी समस्याएं लेकर आए लोगों के लिए पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं था।किसानों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के अधीक्षक के कक्ष में जाकर पानी की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। वहां उन्हें आरओ लगे होने की जानकारी दी गई, लेकिन किसानों के अनुसार उसमें भी पानी उपलब्ध नहीं था।
किसानों ने कहा कि उनकी मांग केवल ज्ञापन लेने तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि 37 सूत्रीय मांगों पर प्रशासन स्तर से समयबद्ध कार्रवाई की जाए। फसल बीमा, समर्थन मूल्य, सिंचाई, बिजली और राजस्व से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई। कलेक्ट्रेट परिसर में धरने और कलेक्टर से मुलाकात की मांग को लेकर किसानों का इंतजार शाम तक जारी रहा। इस दौरान ज्ञापन देने से इनकार और हनुमान चालीसा पाठ के जरिए किसानों ने अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताई।