भोपाल: राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने इस फैसले के विरोध में राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर उपवास और धरना प्रदर्शन शुरू किया है। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता, विधायक और कार्यकर्ता शामिल हुए।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक दबाव और षड्यंत्र के माध्यम से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कराया है। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने वाला मामला है।

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वहीं निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार नामांकन पत्र इसलिए निरस्त किया गया क्योंकि एक लंबित मामले की जानकारी शपथ पत्र में शामिल नहीं की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया के तहत प्रत्याशी द्वारा सभी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है।
धरना स्थल पर कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना पर सीधा आघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
विक्रांत भूरिया ने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी और इस फैसले के खिलाफ हर संवैधानिक और कानूनी विकल्प का उपयोग करेगी। उन्होंने कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को प्रदेश स्तर से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।
धरने में मौजूद अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी नामांकन निरस्त किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित कार्रवाई बताया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के समर्थन में नारेबाजी भी की।
फिलहाल कांग्रेस इस पूरे मामले को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौती देने की तैयारी में है। राज्यसभा चुनाव के बीच उत्पन्न इस विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव को और तीखा कर दिया है।