यूपी में बिजली कर्मचारी निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी है। इससे पूरे प्रदेश में बिजली संकट खड़ा हो गया है।
स्थिति यह है कि लखनऊ में सीएम से लेकर डिप्टी सीएम और तमाम मंत्रियों के आवास पर बिजली व्यवस्था चरमराती दिख रही है।
कार्य बहिष्कार के पहले ही दिन कई मंत्रियों के यहां बिजली गुल हो गई। वहीं मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार को देखते हुए ऊर्जा विभाग की बड़ी बैठक तलब कर ली है।
ऊर्जा विभाग की बड़ी बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी, प्रमुख सचिव ऊर्जा अरविंद कुमार और वित्त विभाग के अधिकारियों को तलब किया गया है।
ऊर्जा मंत्री और संघर्ष समिति के बीच सोमवार को जिस समझौते पर सहमति बनी थी। उसके तहत घाटे को कम करने के लिए कर्मचारियों को सुधार के लिए मौका दिया गया था।
मंत्री ने सुधार के लिए बिजलीकर्मियों को 31 मार्च तक का समय दिया था जिसके बाद मार्च तक पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को टालने पर सहमति बनी थी।
इसके बाद बिजली कर्मचारी संघर्ष समिति ने आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया था, लेकिन यूपीपीसीएल चेयरमैन इसके लिए तैयार नहीं हुए और बात बिगड़ गई।