भोपाल स्थित भारत भवन परिसर में शुक्रवार को वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित महाभारत समागम का भव्य शुभारंभ डॉ. मोहन यादव ने किया। यह वैचारिक और सांस्कृतिक आयोजन आगामी 24 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन चलेगा, जिसमें विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, विचार गोष्ठियां और प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी। उद्घाटन अवसर पर भारत भवन परिसर बहुरंगी सांस्कृतिक गतिविधियों से सराबोर नजर आया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नरेन्द्र मोदी विरासत से विकास की ओर देश को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। उन्होंने विश्व पटल पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास कर रहे हैं और जब अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत आते हैं, तो उन्हें पवित्र श्रीमद्भगवद गीता भेंट की जाती है, जो भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक सभ्यताओं के संघर्ष और औदार्य की महागाथा महाभारत पर केंद्रित यह देश का पहला और अब तक का सबसे वृहद आयोजन है। उन्होंने कहा कि इस समागम में आकर ऐसा प्रतीत होता है मानो महाभारत काल में पहुंचकर घटनाओं को प्रत्यक्ष देखा जा रहा हो। कलाकारों ने पात्रों को जीवंत करते हुए कथा का ऐसा ताना-बाना बुना है, जो दर्शकों को भावविभोर कर देता है।

इस अवसर पर खुले विशाल मंच पर मेत्रैयी पहाड़ी और उनके कलाकार साथियों ने विश्व को शांति और न्याय का संदेश देने वाली सशक्त सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने भारत भवन की कला दीर्घाओं में आयोजित दो विशेष प्रदर्शनियों का भी अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि महाभारत समागम में इंडोनेशिया सहित अन्य देशों के नाट्य समूहों को भी आमंत्रित किया गया है। यह वीर भारत न्यास का एक महत्वपूर्ण वैचारिक और सांस्कृतिक उपक्रम है, जो आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति और सभ्यता से जोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस जैसे विशेष अवसरों पर भी इस प्रकार की प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रामायण और महाभारत काल की घटनाओं को देखने और समझने से भारत की आत्मा को जाना जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने सदियों तक आक्रमणों और संघर्षों का सामना किया, लेकिन इसके बावजूद भारतीय सभ्यता की उदारता और लचीलापन इसे विशिष्ट बनाता है। अनेक सभ्यताएं काल प्रवाह में समाप्त हो गईं, लेकिन भारत कठिन परिस्थितियों से उबरकर बार-बार खड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गीता जयंती के अवसर पर राज्य स्तर पर गीता पाठ प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसके साथ ही वीर भारत न्यास द्वारा श्रीमद्भगवद गीता ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत संतोषजनक है कि बड़ी संख्या में युवाओं ने इसमें भाग लिया। लाखों विद्यार्थियों ने गीता के माध्यम से ज्ञान, कर्म और भक्ति के मार्ग को समझा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतियोगिता के 88 विजेताओं में से कुछ प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए। उल्लेखनीय है कि कुल ₹90 लाख के पुरस्कार वितरित किए गए, जिनमें नगद राशि के साथ-साथ लैपटॉप, ई-रिक्शा और ई-बाइक शामिल हैं। एक लाख रुपए का पुरस्कार जीतने वाली हिमांशी मिश्रा ने मुख्यमंत्री से भेंट की। हिमांशी ने बताया कि उन्होंने गीता पाठ अपने माता-पिता से सीखा। इसके अलावा रायसेन की दीक्षा सिंह, ग्वालियर की मान्या भटनागर और छिंदवाड़ा के गोविंद सिंह को भी नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाकर आयोजन का शुभारंभ किया। इस दौरान श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की पत्रिका और वेबसाइट का लोकार्पण किया गया तथा “भूली-बिसरी सभ्यताएं” पुस्तक का विमोचन भी हुआ। वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्री राम तिवारी ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए।
इस अवसर पर विधायक विष्णु खत्री, वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी, संस्कृति संचालक एन. पी. नामदेव, टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मोहन तिवारी, मुकेश मिश्रा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।