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Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई बीआर गवई पर हमला,देशभर में आक्रोश और निंदा की लहर

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई बीआर गवई पर जूता फेंकने की घटना ने देशभर में आक्रोश और निंदा की लहर फैला दी।प्रधानमंत्री मोदी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई नेताओं ने इसे लोकतंत्र और न्यायपालिका पर हमला बताया।इस घटना ने समाज में बढ़ती असहिष्णुता और न्यायिक गरिमा की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।

By: RNI Hindi Desk 
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Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई बीआर गवई पर हमला,देशभर में आक्रोश और निंदा की लहर

सुप्रीम कोर्ट में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई जब देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई पर एक वरिष्ठ वकील ने जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि यह प्रयास असफल रहा, लेकिन इस घटना ने देश के न्यायिक तंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों को हिला कर रख दिया। आरोपी वकील राकेश कुमार (71 वर्ष) को तुरंत सुरक्षा कर्मियों ने पकड़ लिया और पूछताछ के बाद रिहा कर दिया। इस घटना ने पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि “ऐसे निंदनीय कार्यों का भारत के लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।” उन्होंने सीजेआई गवई से फोन पर बात कर उनके धैर्य और संयम की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घटना हर भारतीय को व्यथित करती है और यह हमारे संविधान के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे “अभूतपूर्व, शर्मनाक और अमानवीय” बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और कानून के शासन पर हमला है। खरगे के अनुसार, पिछले एक दशक में समाज में नफरत और असहिष्णुता का प्रसार बढ़ा है, और यह घटना उसी का परिणाम है।

राहुल गांधी ने कहा कि “सीजेआई पर हमला संविधान की आत्मा पर प्रहार है। भारत जैसे विविधता भरे देश में नफरत और हिंसा की कोई जगह नहीं हो सकती।”
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस घटना को “लोकतंत्र और न्याय प्रणाली पर सीधा हमला” बताते हुए कहा कि “सीजेआई गवई ने अपने संघर्ष और योग्यता के बल पर यह पद हासिल किया है। उन पर हमला समाज की उस सोच को दर्शाता है जो समानता और न्याय से भयभीत है।”

वहीं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस घटना के लिए “विभाजनकारी राजनीति और नफरत की संस्कृति” को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सीजेआई गवई सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं और उन पर हमला संविधान की भावना को कमजोर करने का प्रयास है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी है। अदालत वह स्थान है जहाँ न्याय और संयम सर्वोपरि होना चाहिए, वहाँ इस तरह की हरकतें अस्वीकार्य हैं।

देशभर के नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने भी इस हमले की निंदा करते हुए न्यायपालिका की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। इस घटना ने समाज को एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि लोकतंत्र की मर्यादा और संस्थाओं के सम्मान को बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

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