रिपोर्ट – माया सिंह
छतरपुर : देश में कोरोना संक्रमण अब भयानक रूप लेने लगा है । रोजाना हजारों की तदाद में लोग जान गवां रहे हैं । इसी बीच मध्य प्रदेश से सामाजिक सुरक्षा के प्रति एक अच्छी मिसाल पेश करने वाली ख़बर सामने आई है । जैसा कि आप जानते है कि ईसाई धर्म में मृत व्यक्ति के शव को जलाने के बजाय दफनाया जाता है लेकिन एमपी के ईसाई धर्म के एक युवक ने अपने माता – पिता के शवों को दफनाने के जगह हिन्दू रीति –रिवाज में दाह संस्कार कर समाज में जागरूकता के लिये संदेश दिया है ।

ईसाई दंपत्ति के 35 वर्षीय बेटे का कहना है कि कोरोना संक्रमित मृतकों को दफनाने के जगह जलाना सही है । इससे कोविड-19 की वायरस भी जल जाएगा , जिसके कारण उस जगह से गुजरने वाले को संक्रमित होने का खतरा नहीं रहेगा । बेटे के अपील पर शासन के सहयोग से कोविड गाइडलाइन के तहत हिन्दू रीति-रिवाज में अंतिम संस्कार किया गया ।
जानकारी के मुताबिक मिर्जापुर शहर में , महोबा रोड स्थित मिशन अस्पताल में 65 वर्षीय क्रिश्चियन वृद्ध और उसकी 61 वर्षीय पत्नी कोविड वार्ड में भर्ती थे और इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई । इसके बाद मृतक दंपत्ति के बेटे ने कब्रिस्तान में दफनाने की बात कही तो छतरपुर क्रिश्चियन समाज द्वारा संचालित कब्रिस्तान प्रबंधन ने साफतौर पर माना कर दिया ।

इसके बाद नगर पालिका प्रबंधन ने कोविड नियमों के अंतर्गत सागर रोड स्थित भैंसासुर मुक्तिधाम में हिंदू संस्कृति के तहत उनका अंतिम संस्कार कराया । दंपत्ति के बेटे ने मुखाग्नि देकर अपने माता-पिता का अंतिम संस्कार किया ।
छतरपुर में ईसाई समाज के अध्यक्ष जयराज ब्राउन का कहना है कि कब्रिस्तान में दफनाने से किसी को रोका नहीं गया है । दंपत्ति के बेटे ने ही सुरक्षा के दृष्टि से दाह संस्कार करने का खुद फैसला लिया है । उनको पार्थिव शरीर ताबूत में रखकर दफनाने के बजाय अग्नि में जला देना कोरोना सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादा ठीक लगा ।