बालाघाटः मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सूपखार एवं टोपला क्षेत्र में ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ किया। इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के लिए आज का यह ऐतिहासिक दिन है। 150 साल के बाद मध्यप्रदेश की धरती पर कान्हा टाइगर अभयरण्य में एक बार फिर जंगली भैंसा रखे गए हैं। यह पर्यावरण और परिस्थिति तंत्र के लिए यह अद्भुत अवसर है। हमारी अपनी धरती पर हमारे गए मेहमान की शुभ आगमन है।

इनके आने से हमारे पूरे ईको सिस्टम में बड़ी मदद रहेगी। इससे न केवल हमारा जंगल समृद्ध होता है बल्कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमारे एक-एक करके वह सारे विलुप्त या कई साल पहले यहां से चले गए। अब मध्यप्रदेश के जंगल में सारे जानवर आ रहे हैं। जिनसे हमारे जंगल की शोभा भी बढ़ेगी और टूरिज्म की दृष्टि से अनुकूलता बनेगी। वहीं डॉ. यादव ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा को धन्यवाद देते हुए कहा कि असम के साथ हमारा एक नया रिश्ता बना है। जब हमने असम का विजिट किया था तो जंगली भैंसा और गैंडा लाने की बात की थी इसी कड़ी का पहला चरण आज प्रारंभ हुआ है। मध्यप्रदेश का जो अतीत का गौरवशाली पक्ष रहा है वह पुनः समृद्ध हो रहा है। हम जो इस पीढ़ी के लिए छोड़कर जाएंगे आने वाले समय में और आगे बढ़े इस दिशा में लगातार काम कर रहे है।

2022 में पूरे एशिया महाद्वीप से चीता गायब हो गए थे। न केवल उनका पुरनर्वसान बल्कि हमारा जोर चीता के अभयारण्य सागर और श्योपुर जिलों में प्रारंभ हुआ। तीसरा भी हमारा सागर के पास बनकर तैयार है। ऐसे में हम एक-एक करके सारे वन्य प्राणियो के लिए काम कर रहे हैं। जो भविष्य की दृष्टि से यह धरोहर के रूप में रहेगी।