बुलंदशहर से जावेद खान की रिपोर्ट
यूपी के बुलंदशहर के अनूपशहर में स्थित परदादा परदादी ग्रुप द्वारा संचालित आई विलेज स्वयं सहायता समहू की कार्यशाला जहां लॉक डाउन से पहले कोट कवर बना करते थे और ब्लैक बैरी जैसी ब्रान्डेड कंपनी को सप्लाई किये जाते थे।
मगर लॉक डाउन के बाद यहां मास्क बनाये जाने लगे और यहां आयी कई प्रवासी मजदूरो की पत्नियां मास्क बनाने में जुट गयी और अपने परिवार का भरण पोषण करने लगी।
दरअसल आई विलेज 150 स्वयं सहायता समहू का संचालन कर लगभग 5000 लोगो को रोजगार दे रही है लेकिन अब लॉक डाउन में जब बाजार बंद है तो यहां कपड़े के मास्क बनाने शुरू कर दिये।
यहा काम कर रही नीलम शर्मा की माने तो उनका पति दिल्ली में गाड़ी चलाने का काम करते थे मगर लॉक डाउन के बाद दिल्ली से बुलंदशहर लौटे तो स्वयं सहायता समहू से जुड़कर मास्क बनाने में जुट गयी।
पति के पास इन दिनों कोई काम नहीं है तो मास्क बनाकर ही नीलम परिवार का भरण पोषण कर रही है।
ऐसी ही मिलती जुलती कहानी उषा की भी है, इसका पति अनूपशहर में ही ठेला लगाता था, मगर लॉक डाउन में वो भी बंद हो गया, उषा भी अब मास्क बनाकर घर चला रही है।
संजना का पति भी दिल्ली में काम करता था, लॉक डाउन के बाद न काम रहा, न राशन और न ही सरकारी मदद , वो अनूपशहर आयी और यहां मास्को की फिनिशिंग कर परिवार के भरण पोषण में जुट गयी।
यदि सरकारी डिमांड व आर्थिक मदद मिले तो बड़े पैमाने पर ये काम हो सकता है, अभी 6000 मास्क रोजाना बन रहे है।