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ब्रॉयलर मुर्गीपालन: पढ़िए कैसे बेरोज़गारी की समस्या होगी दूर

By: RNI Hindi Desk 
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ब्रॉयलर मुर्गीपालन: पढ़िए कैसे बेरोज़गारी की समस्या होगी दूर

ब्रॉयलर मुर्गीपालन व्यवसाय मीट के ही उत्पादन के लिए किया जाता है। ऐसा देखा गया है कि ब्रॉयलर मुर्गीपालन यानि मीट उत्पादन अण्डा उत्पादन से लाभकारी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ब्रॉयलर मुर्गीपालन के लिए चूज़े 40- 45 दिनों में तैयार हो जाते हैं जबकि अण्डा उत्पादन के लिए तैयार होने में मुर्गियों को साढ़े पांच महीने तक का समय लग जाता है।

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ऐसे मुर्गे जिन्हें सिर्फ मीट  के लिए पाला जाता है, उन्हें ब्रॉयलर मुर्गा कहते हैं। इन मुर्गों का पालन ही ब्रॉयलर मुर्गीपालन कहा जाता है।

गर्मी में आपको इन पोल्ट्री बर्डस का खास ध्यान रखना होता है। जैसे इनके आवास के दरवाजे या खिड़कियों पर पर्दा हटा दें। ज्यादा गर्मी पड़ने पर फैन की व्यवस्था करें। इसके साथ ही लू से बचाने के लिए चारों तरफ टाट के बोरे लगाकर पानी का छिड़काव करें।  

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शुरुआत के दिनों में पोषक आहार दें। ब्रॉयलर मुर्गीयो को भर पेट खिलाएं जिससे वो तेजी से बढ़ेंगे। ब्रायलर चूजे अंडे देने वाली मुर्गी की तुलना में काफी तेजी से बढ़ते हैं। वृद्घि की गति को ध्यान में रखकर इनके लिए दो तरह के आहार उपयोग में लाये जाते हैं।

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चूजों को शुरुआती दिनों में दिए जाने वाले आहार को स्टार्टर कहते हैं। बाड़े में रखने के चार सप्ताह में ब्रायलर को स्टार्टर आहार दिया जाता है, जिसमें करीब 23 फीसदी प्रोटीन और करीब 3000 कैलोरी ऊर्जा होती है। इससे पक्षियों का वजन और मांसपेशियों का विकास तेजी से होता है।

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