नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के चौथे चरण का चुनाव शुरू हो चुका है, जिसमें कुछ जगहों को छोड़कर सभी जगह शांतिपूर्ण मतदान होने की खबर आ रही है। इसी बीच पश्चिम बंगाल के पंजीपाड़ा थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर आई, जिसने एक बार फिर ममता सरकार में बढ़ने वाले अपराध पर मोहर लगा दिया। दरअसल बिहार के किशनगंज के थानेदार अश्वनी कुमार एक वॉन्टेड अपराधी को पकड़ने पंजीपाड़ा थाना के पनतापारा गांव गये थे, जहां कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर उन पर हमला कर दिया और पीट-पीटकर मार डाला।

आपको बता दें कि इस मामले पश्चिम बंगाल प्रशासन के लापरवाही और मिलीभगत होने की भी खबरें आ रही है। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार-शनिवार रात 2 बजे के आसपास किशनगंज थाना के प्रभारी अश्विनी कुमार बंगाल के पनतापारा गांव में एक वॉन्टेड अपराधी की तलाश में अश्वनी निकले थे। रात में ही अश्वनी कुमार बंगाल के स्थानीय थाने भी पहुंचे, तो वहां थाना प्रभारी ने बोल दिया कि ओडीओ उनके साथ जाएगा। ओडीओ ने बोला कि आप जाइए, हम आते हैं। ऐसे में अश्वनी कुमार अकेले ही गांव पहुंच गए। इसके बाद गांव वालों ने लाठी, डंडे और पत्थर से पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी।
फिलहाल अश्वनी कुमार का शव बंगाल के इस्लामपुर अस्पताल में है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद बिहार पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह ने पीड़ित परिवार को केंद्र सरकार और राज्य सरकार की तरफ से 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। आपको बता दें कि बिहार के किशनगंज की सीमा पश्चिम बंगाल की सीमा से सटी हुई है, जिस कारण अपराधी अपराध की घटना को अंजाम देने के बाद बंगाल में छिप जाते है और जब बिहार प्रशासन उन अपराधियों पर नकेल कसना शुरू करता है, तो उन अपराधियों का पनहगार उन्हें संरक्षण देकर उनके हौसले को और बुलंद करते है। वहीं प्रशासन की लापरवाही उन्हें और साहस देने का काम करता है।