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ग्वालियर कोर्ट का बड़ा फैसला: तत्कालीन SP समेत 4 पुलिसकर्मियों पर लूट-डकैती का केस दर्ज करने का आदेश

ग्वालियर जिला न्यायालय ने एक अहम फैसले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश चंदेल सहित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ लूट, डकैती और अवैध वसूली जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज करने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता अनूप राणा ने आरोप लगाया था कि 2023 में पुलिस ने उन्हें झूठे मामले में फंसाकर 30 लाख रुपये की अवैध वसूली की और एनकाउंटर की धमकी दी। करीब दो साल की सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को 22 जून को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।

By: Nivedita 
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ग्वालियर कोर्ट का बड़ा फैसला: तत्कालीन SP समेत 4 पुलिसकर्मियों पर लूट-डकैती का केस दर्ज करने का आदेश

ग्वालियर जिले में कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश चंदेल सहित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ लूट, डकैती और अवैध वसूली जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2023 का बताया जा रहा है, जिसने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है।

शिकायतकर्ता ने लगाए 30 लाख की अवैध वसूली के आरोप

शिकायतकर्ता अनूप राणा ने आरोप लगाया है कि पुराने लेन-देन विवाद के चलते पुलिस ने उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया। साथ ही एनकाउंटर की धमकी देकर उनसे और एक महिला के घर से लगभग 30 लाख रुपये की अवैध वसूली की गई।

एनकाउंटर की धमकी और गिरफ्तारी का आरोप

आरोपों के अनुसार तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी के इशारे पर पुलिसकर्मियों ने पीड़ित को धमकाया और पैसे न देने पर जान से मारने या एनकाउंटर करने की चेतावनी दी। इसके बाद शिकायतकर्ता को दोबारा थाने बुलाकर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

कोर्ट में किन अधिकारियों को माना गया आरोपी

इस मामले में कोर्ट ने जिन पुलिसकर्मियों को आरोपी माना है, उनमें शामिल हैं—

* तत्कालीन SP राजेश चंदेल
* तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह यादव
* सब इंस्पेक्टर अजय सिंह
* हवलदार संतोष वर्मा

लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला

जेल से रिहा होने के बाद अनूप राणा ने 2024 में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। लगभग दो साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ लूट, डकैती, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने जैसी धाराओं में केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

22 जून को पेश होने के आदेश

कोर्ट ने सभी आरोपियों को 22 जून को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया है। इस फैसले को न्यायपालिका की सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह संदेश गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह वर्दी में ही क्यों न हो।

 

 

 

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