नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल पूरी तरह हिंसा की चपेट में था। इसे लेकर ममता सरकार लगातार विपक्षी पार्टियों को दोषी ठहरा रही थी। वहीं इस मामले में अदालत के समक्ष कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थी। इन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव बाद हिंसा मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
साथ ही कोर्ट ने एसआईटी टीम के गठन का भी निर्देश दिया है और राज्य सरकार को पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए कहा है। आपको बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के मामलों में हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराध, बलात्कार सहित मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अन्य सभी मामलों की जांच एसआईटी को सौंपी है।
SIT की निगरानी कोर्ट भी करेगा
बेंच ने बताया कि एसआईटी की निगरानी कोर्ट भी करेगा। मामले की सुनवाई कर रहे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने कहा कि अलग-अलग फैसले हैं लेकिन सभी सहमत हैं। अदालत के समक्ष कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चुनाव के बाद की हिंसा में लोगों के साथ मारपीट की गई, उन्हें घर से भागने के लिए मजबूर किया गया और उनकी संपत्ति को नष्ट कर दिया गया और इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
मामले में 3 अगस्त को सुनवाई पूरी हुई थी और हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने फैसला सुनाया। जिसमें न्यायमूर्ति आई पी मुखर्जी, हरीश टंडन, सौमेन सेन और सुब्रत तालुकदार शामिल थे। पीठ ने पहले एनएचआरसी अध्यक्ष को “चुनाव के बाद की हिंसा” के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति गठित करने का आदेश दिया था। रिपोर्ट सौपने के बाद अब अगली सुनवायी 24 अक्टूबर को होगी।