रिपोर्ट: अनुष्का सिंह
देहरादून: आज से 29 साल पहले छिडी एक सियासी और कानूनी जंग एक बार फिर सुर्खियां बटोर रही हैँ। उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता पूर्व सांसद डीपी यादव जिन पर आज से 29 साल पहले अपने मित्र व गौतम बुद्ध नगर की दादरी सीट से विधायक महेंद्र सिंह भाटी की हत्या का आरोप लगा था। जिसके चलते व पिछले कई सालो से जेल मे राते गुज़ार रहे थे। लेकिन 10 नवंबर के दिन नैनीताल हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिससे गौतमबुद्धनगर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे हलचल का माहौल है। दरअसल हाई कोर्ट ने विशेष सीबीआई अदालत के दोषसिद्धि फैसले को रद्द करते हुऐ सांसद और विधायक धर्मपाल यादव को महेंद्र सिंह भाटी हत्याकांड के आरोप से बरी कर दिया है।
आपको बता दे कि आज से लगभग 29 साल पहले यानी कि 13 सितंबर 1992 को विधायक महेंद्र सिंह भाटी अपने एक मित्र, गनर और ड्राइवर के साथ घर से निकले थे लेकिन रास्ते मे भंगेल क्रॉसिंग बंद होने के कारण कुछ देर वहीं रुकना पड़ा। और जैसे ही फाटक खुला दुसरी कार मे आये कुछ बदमाशों ने भाटी की गाड़ी पर हमला बोल दिया। अत्याधुनिक हथियारों से धूआधार फायरिंग शुरू हो गई। और जब तक गोलियों का शोर रुका वहाँ लाशे बिछ गई। और इस पूरे हत्याकांड का आरोप डीपी यादव पर लगाया गया।
लगाये गये आरोप के चलते सीबीआई अदालत ने फरवरी 2015 में यादव और उनके तीन अन्य साथी परनीत भाटी, करण यादव और पाल सिंह उर्फ लक्कर पाला को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिसके बाद चारो आरोपियों ने फैसले कि खिलाफ अपील याचिका दायर की थी। जिसमे करन यादव हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र दायर कर कहा था कि उनकी पत्नी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। उनका लंबे समय से दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा है। पत्नी की देखभाल के लिए उसे एक माह की शॉर्ट टर्म बेल दी जाए। जिस पर कोर्ट ने करन को पत्नी की देखबाल के लिए एक महिने की शॉर्ट टर्म बेल को मंज़ूरी दे दी थी।
दायर याचिका के चलते अब हाई कोर्ट जज आरएस चौहान और जज आलोक कुमार वर्मा की बेंच ने पूर्व सांसद की निचली अदालत की सजा को खारिज करते हुए अन्य तीन आरोपियों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत का कहना है कि यादव के खिलाफ अपराध सिद्ध करने के लिए कोई ‘ठोस सबूत’ नहीं मिला है। इसिलिये कोर्ट यादव को बरी करने का फैसला सुनाती है।
आपको बता दे कि महेंद्र सिंह भाटी और डीपी यादव बहुत अच्छे दोस्त थे। डीपी यादव, महेंद्र सिंह भाटी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब थे। भाटी ने 1988 में डीपी यादव को सबसे पहले बिसरख ब्लॉक का प्रमुख बनवाया था। जिसके बाद 1989 में महेंद्र सिंह भाटी ने अपने करीबी नरेंद्र भाटी को सिकंदराबाद से और डीपी यादव को बुलंदशहर विधानसभा क्षेत्रों से जनता दल का टिकट दिलवाया। महेंद्र सिंह भाटी खुद दादरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे। जनता दल की लहर थी और तीनों जीत भी गए थे। लेकिन यहीं से महेंद्र सिंह भाटी का दुर्भाग्य शुरू हुआ। देश में राजनीतिक हवा बदल रही थी। इसका प्रभाव इनकी यारी पर भी पड़ा।वहीं, उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और अजित सिंह में लाइन खिंच चुकी थी और यहीं पर डीपी यादव और महेंद्र सिंह भाटी के भी रास्ते अलग हो गए थे।