दिल्ली में कॉम्बेटिंग ड्रग ट्रैफिकिंग पर बिम्सटेक सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि, अगस्त 2018 में, पीएम मोदी ने नेपाल के काठमांडू में आयोजित 4 वें शिखर सम्मेलन में इस सम्मेलन की घोषणा की थी। मुझे खुशी है कि हमें उनकी घोषणा और विजन का एहसास हुआ है।
उन्होंने कहा कि, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा आज बिम्सटेक देशों के लिए नारकोटिक्स ड्रग्स जैसे संवेदनशील विषय पर 2 दिन का सम्मेलन आयोजित किया गया है। इन दो दिनों में इन विषयों से सबंधित सभी पहलुओं पर आप सभी के बीच विचार विमर्श होगा और कुछ निर्णय भी लिए जाएंगे।
हम नशीली दवाओं के आयात या निर्यात की अनुमति नहीं देंगे। हम ड्रग तस्करी को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। मैं NCB को इसके मैनुअल के लिए बधाई देता हूं, जो बहुत कम समय में तैयार किया गया है। भारत में नशीली दवाओं के प्रति शून्य-सहिष्णुता है।
मैं आज आप सबको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम दुनिया में से कहीं से भी भारत में मादक पदार्थों को आने भी नहीं देंगे और भारत से कहीं जाने भी नहीं देंगे। पूरी दुनिया में मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए हम कृत संकल्पित हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा पेश की गई वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट के अनुसार, 15-64 वर्ष के बीच के 5.5% लोग पूरी दुनिया में दवाओं का उपयोग कर रहे हैं। इसका मतलब है कि 27 करोड़ से अधिक लोग ऐसी दवाओं का उपयोग करते हैं।
भारत ने मादक पदार्थों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी है। हमने देश में नारकोटिक्स कंट्रोल के प्रति सख्ती के लिए कई कदम उठाये हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी UN और इंटरपोल के साथ भी अनेक कदम उठाये हैं। बिम्सटेक कॉन्फ्रेंस के साथ इस दिशा में ये एक नया कदम है। भारत सरकार ने नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी को रोकने हेतु अंतराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय स्थापित किया है। पिछले पांच वर्षों में भारत ने बांग्लादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, सिंगापुर, म्यांमार और रूस के साथ नियमित द्विपक्षीय वार्ताओं को भी आयोजित किया है।
अब तक हमने जिस नीति या सोच के साथ मादक पदार्थों का सामना किया है, अब इस नई परिस्तिथि में वो नीतियां सफल हो पाएंगी, ये जरूरी नहीं है। हम सबको मिलकर कुछ ऐसे नए विचार करने पड़ेंगे, जिससे हम इस परिस्थिति से निपट सकें।