गोरखपुर में जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। करीमनगर पोखरभिंडा निवासी इंद्रसेन यादव ने आरोप लगाया है कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में गलत तरीके से मुआवजा तैयार कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। पीड़ित ने लेखपाल और उनके सहयोगियों पर करीब 25 लाख रुपये से अधिक के कथित घोटाले की आशंका जताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
इंद्रसेन यादव का आरोप है कि स्पोर्ट्स कॉलेज से झुंगिया मार्ग पर स्थित उनकी जमीन के सामने पुराने नक्शे में 66 फीट चौड़ी सड़क दर्ज थी। सड़क चौड़ीकरण के दौरान उनकी वास्तविक जमीन कम प्रभावित हुई, लेकिन आरोप है कि लेखपाल नेहा पांडे और उनके सहयोगियों ने अधिक भूमि दिखाकर करीब 40 लाख रुपये का मुआवजा तैयार कर दिया। पीड़ित का कहना है कि वास्तविक रूप से उनकी जमीन का एक छोटा हिस्सा ही प्रभावित हुआ था, इसके बावजूद रिकॉर्ड में अधिक भूमि दर्शाकर मुआवजा स्वीकृत किया गया।
पीड़ित ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी और तहसीलदार स्तर पर की थी। उनका आरोप है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही और कई बार शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों पर अनियमितता के आरोप हैं, उन्हीं से जुड़ी प्रक्रिया में जांच कराई गई, जिससे मामले की सच्चाई सामने नहीं आ सकी।

इंद्रसेन यादव ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाए। उनका दावा है कि निष्पक्ष जांच होने पर मुआवजा वितरण में हुई बड़ी अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
फिलहाल पीड़ित ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। मामले में प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।