पन्ना जिला चिकित्सालय एक बार फिर सुर्खियों में है। अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में पिछले एक माह के दौरान जन्म से लेकर एक वर्ष तक की उम्र के 22 मासूम बच्चों की मौत होने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) राजेश प्रसाद तिवारी स्वयं जिला चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण कर उपचार व्यवस्था, चिकित्सकीय स्टाफ की उपलब्धता, उपकरणों की स्थिति और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समीक्षा की। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी मामलों की जांच की जा रही है और मौतों के कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।

लगातार हो रही मासूमों की मौतों से परिजनों में आक्रोश है। वे बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि, मौतों के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक महीने में 22 मासूमों की मौत के पीछे वास्तविक वजह क्या है? क्या यह गंभीर चिकित्सीय मामलों का परिणाम है, या स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी रही? इसका जवाब अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
राजेश रावत की रिपोर्ट